भारत में खेती को आधुनिक बनाने के लिए मशीनीकरण की भूमिका बहुत अहम है। इससे न केवल श्रम की बचत होती है, बल्कि समय और लागत भी घटती है और उत्पादकता में वृद्धि होती है। लेकिन क्या खेती में मशीनों का इस्तेमाल किसानों तक वास्तव में पहुंच पाया है? आइए इस सवाल का विश्लेषण करते हैं।
खेती में मशीनों का इस्तेमाल: क्या है मौजूदा स्थिति?
खेती में मशीनीकरण का स्तर अलग-अलग राज्यों और फसलों में भिन्न है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार:
- खेत तैयार करना (जुताई, रोटावेटर): 70%
- बीज बोना/पौधे लगाना: 40%
- निराई-गुड़ाई: 32%
- फसल कटाई और दाना निकालना: 34%
- औसतन मशीनीकरण स्तर: लगभग 47%
यह आंकड़े दिखाते हैं कि अभी भी आधे से ज्यादा कृषि कार्य मशीनों से नहीं हो रहे हैं।
किसानों के लिए मशीनों की पहुंच क्यों है मुश्किल?
- उच्च लागत: आधुनिक कृषि मशीनें महंगी होती हैं, जिन्हें छोटे और सीमांत किसान नहीं खरीद सकते।
- तकनीकी ज्ञान की कमी: किसानों को सही मशीन का चुनाव, संचालन और देखभाल की जानकारी नहीं होती।
- मरम्मत और सर्विस नेटवर्क की कमी: ग्रामीण इलाकों में मशीनों के स्पेयर पार्ट्स और तकनीशियनों की उपलब्धता सीमित होती है।
- बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर: खराब सड़कें, बिजली की कमी और ट्रांसपोर्ट की असुविधा मशीनीकरण को रोकती है।
- क्रेडिट और फाइनेंस की बाधाएं: मशीनें खरीदने के लिए सस्ती और सुलभ वित्तीय सहायता नहीं मिलती।
सरकार क्या कर रही है?
- फार्म मशीनरी बैंक (FMB) और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC):
- योजना: 2023 में शुरू की गई योजना के तहत छोटे किसान मशीनें किराए पर ले सकते हैं।
- सरकारी सहायता: 10 लाख रुपये के खर्च पर 8 लाख रुपये तक सब्सिडी।
- सब्सिडी DBT के जरिए बैंक खातों में जाती है।
- कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (SMAM):
- शुरुआत: 2014-15
- उद्देश्य: किसानों को मशीनें खरीदने में आर्थिक मदद देना।
- फसल अवशेष प्रबंधन योजना (CRM):
- खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली के किसानों को पराली प्रबंधन मशीनें देने के लिए सहायता।
क्या किसानों को मिल रहा है फायदा?
- SMAM योजना से अब तक 19.5 लाख मशीनें किसानों को दी गई हैं।
- 52,000+ फार्म मशीनरी बैंक और CHC देश में खोले जा चुके हैं।
- 3.23 लाख पराली प्रबंधन मशीनें वितरित की गईं।
लेकिन सवाल यह है कि ये आंकड़े जमीनी स्तर पर कितने असरदार हैं?
सरकार ने सर्वे क्यों शुरू किया है?
ICAR-CIAE भोपाल को जुलाई 2024 में यह जिम्मेदारी दी गई कि वे एक राष्ट्रीय सर्वे करें जिससे यह पता चल सके:
- किसानों को कौन-कौन सी मशीनें चाहिए?
- मशीनें वो कितनी इस्तेमाल करते हैं?
- योजना की जमीनी हकीकत क्या है?
- सर्वे के आधार पर नई नीतियां बनेंगी जो मशीनीकरण को और सरल और सुलभ बना सकें।
- मशीनों की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया
- BIS ने 296 मानक तय किए हैं।
- मशीनों की जांच देशभर में 4 फार्म मशीनरी ट्रेनिंग और टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (FMTTI) द्वारा होती है।
- सरकार केवल उन्हीं मशीनों को बढ़ावा देती है जिन्हें इन संस्थानों से प्रमाणपत्र मिला हो।
समाधान की ओर कदम जरूरी
खेती में मशीनीकरण भारतीय कृषि की रीढ़ को मज़बूत बना सकता है, लेकिन इसकी राह में कई चुनौतियां हैं:
- स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण
- सरल मशीनों का निर्माण
- सस्ती लीजिंग सुविधा
- सशक्त कस्टम हायरिंग नेटवर्क
यदि इन पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जाए, तो मशीनीकरण सिर्फ सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव में खेती को आसान और लाभदायक बना देगा।
अब ज़रूरत है योजना से ज़मीनी बदलाव की।
Read More
- Tomato Cultivation: गर्मियों में टमाटर की अर्का सौरभ किस्म की खेती शुरू करें
- Marigold cultivation: अप्रैल में शुरू करें गेंदे की अर्का भानु किस्म की खेती, सिर्फ 50 दिन में कमाएं
- Gardening Tips: तुलसी का पौधा सूखता है बार-बार? जानें माली की बताई खास खाद
- Cultivation of Saffron: घर पर करें केसर की खेती, छत या बालकनी में उगाएं ‘लाल सोना’
- Organic Farming: रासायनिक खेती छोड़ जैविक खेती अपनाने में क्या हैं चुनौतियां?
Discover more from अपना रण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

