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भारत की खेती परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन बदलते समय के साथ-साथ इसमें भी तकनीकी बदलाव आ रहे हैं। अब वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की मदद से ऐसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं, जिनसे किसानों को कम लागत में ज्यादा लाभ मिल रहा है। ऐसी ही एक क्रांतिकारी तकनीक है – एक ही पौधे से दो फसलें प्राप्त करने की तकनीक।

क्या है यह तकनीक?

यह तकनीक मूल रूप से इंटरक्रॉपिंग (Intercropping) या मल्टी क्रॉपिंग सिस्टम पर आधारित है। इसमें दो प्रकार की फसलों को इस तरह उगाया जाता है कि एक ही खेत में एक प्रमुख पौधे से दो बार या दो प्रकार की फसल प्राप्त की जा सकती है। जैसे – एक ही बाग में मुख्य फसल के साथ सहायक फसल को इस तरह उगाना कि दोनों को समान पोषण मिले और उपज में कोई कमी न हो।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए, किसान ने आम के बागान में नींबू, हल्दी, या अदरक जैसी फसलें साथ में उगाई हैं। आम का पेड़ लंबा होता है और उसके नीचे की ज़मीन खाली पड़ी रहती है। इस खाली जगह का उपयोग कर दूसरी फसल लगाई जाती है, जिससे आमदनी दोगुनी हो जाती है। इसी प्रकार, गन्ने के खेत में मूंग या मटर जैसी दलहनी फसलें भी लगाई जा सकती हैं।

वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

कृषि वैज्ञानिकों ने खासतौर पर ऐसी फसल संयोजन तैयार किए हैं, जो एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इससे न सिर्फ भूमि का अधिकतम उपयोग होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। यह तकनीक सतत कृषि को भी प्रोत्साहित करती है, क्योंकि इसमें कीटनाशकों और रसायनों का कम प्रयोग होता है।

किसानों को क्या लाभ?

  • दोगुनी आय: एक खेत से दो फसलें मिलने पर कमाई बढ़ती है।
  • खर्च में कटौती: सिंचाई, खाद और ज़मीन की लागत एक जैसी रहती है।
  • मिट्टी की सेहत बेहतर होती है: फसल चक्र और विविधता से मिट्टी को राहत मिलती है।
  • रोज़गार के नए अवसर: पूरे साल खेती होने से ग्रामीण इलाकों में काम मिलता है।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

यह तकनीक जल संरक्षण में सहायक होती है, क्योंकि एक ही खेत की सिंचाई में दोनों फसलें लाभान्वित होती हैं। साथ ही, कीटनाशकों की कम ज़रूरत से पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है।

कौन-कौन सी फसलें ली जा सकती हैं एक साथ?

कुछ सफल संयोजन निम्नलिखित हैं:

  • गन्ना + अरहर
  • नींबू + हल्दी
  • मक्का + मूंगफली
  • नारियल + अदरक
  • अमरूद + मैथी / पालक

इन संयोजनों से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि बाज़ार में अलग-अलग समय पर फसल बिकने से मूल्य भी अच्छा मिल जाता है।

निष्कर्ष

“एक ही पौधे से दो फसलें” लेने की यह तकनीक किसानों के लिए एक बड़ा वरदान बन सकती है। यह आधुनिक कृषि के उस नए युग की शुरुआत है, जहाँ नवाचार, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान मिलकर एक टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह तरीका न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले समय में देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।

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