जगन्नाथ यात्रा और कुछ रोचक तथ्य

1. जगन्नाथ यात्रा क्या है? जगन्नाथ यात्रा भारत के ओडिशा राज्य के पुरी शहर में हर साल निकाली जाती है। यह यात्रा भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा होती है। तीनों देवताओं को विशाल रथों में श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है।

कब होती है यह यात्रा? यह यात्रा हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (जून-जुलाई) में होती है। यात्रा लगभग 9 दिन चलती है और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।

रथ कितने और कैसे होते हैं?  तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं: – भगवान जगन्नाथ का रथ: नंदिघोष, 16 पहिए – बलभद्र का रथ: तालध्वज, 14 पहिए – सुभद्रा का रथ: दर्पदलन, 12 पहिए – रथ लकड़ी से बनाए जाते हैं और हर साल नए बनाए जाते हैं।

4. क्या है गुंडिचा मंदिर का महत्व? गुंडिचा मंदिर वह स्थान है जहाँ भगवान कुछ दिन विश्राम करते हैं। – इसे मौसी माँ का घर भी कहा जाता है। यात्रा के अंत में फिर से तीनों देवताओं को श्रीमंदिर वापस लाया जाता है, जिसे बहुदा यात्रा कहते हैं।

सबसे खास बात – रथ खींचना श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं। माना जाता है कि जो रथ खींचता है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

क्या है 'नेत्र उत्सव' और 'स्नान पूर्णिमा'? स्नान पूर्णिमा पर भगवानों को सार्वजनिक रूप से स्नान कराया जाता है, इसके बाद वे बीमार पड़ जाते हैं (अनुष्ठानिक रूप से)। – फिर 15 दिन तक दर्शन बंद रहते हैं — इस अवधि को 'अनवसर' कहा जाता है। नेत्र उत्सव के दिन भगवान का नया रूप भक्तों को दिखता है और फिर रथ यात्रा शुरू होती है।

क्या विदेशी भी आते हैं?  हाँ, यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्व बन चुका है। न केवल भारत बल्कि अमेरिका, रूस, इंग्लैंड जैसे कई देशों में भी जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन होता है।

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