क्या है 'नेत्र उत्सव' और 'स्नान पूर्णिमा'?
स्नान पूर्णिमा पर भगवानों को सार्वजनिक रूप से स्नान कराया जाता है, इसके बाद वे बीमार पड़ जाते हैं (अनुष्ठानिक रूप से)।
– फिर 15 दिन तक दर्शन बंद रहते हैं — इस अवधि को 'अनवसर' कहा जाता है।
नेत्र उत्सव के दिन भगवान का नया रूप भक्तों को दिखता है और फिर रथ यात्रा शुरू होती है।