हार्ट अटैक क्यों आता है? इससे बचने के क्या उपाय हो सकते हैं? यहां जानें सबकुछ

HEART ATTACK, जिसे सरल भाषा में दिल का दौरा भी कहा जाता है। जो की दिल के किसी हिस्से में ब्लड न पहुंचने पर या कोई दिल की नस (Veins) दब जाने पर होता है। कोविड महामारी के दौरान और उसके बाद इस बीमारी ने अपने पैर और पसार लिए हैं। जहां पहले यह बीमारी 40 या 50 वर्ष के ऊपर के लोगों में दिखाई देती थी वहीं आज ये बीमारी 20 वर्ष से ऊपर या इससे कम उम्र के बच्चों में भी दिखाई देने लगी है। बंगाली एक्टर एंद्रीला शर्मा की 24 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण मृत्यु हो गई।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में बहुत अंतर है। परंतु, ये समझ लेना बहुत जरूरी है कि, हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक है कार्डियक अरेस्ट। इन दोनों के परिभाषा को समझें तो कार्डियक अरेस्ट एक विद्धुतीय समस्या है वहीं हार्ट अटैक ब्लड का सर्कुलेशन न होने के चलते आता है। अंग्रेजी में समझें तो…. CARDIAC ARREST IS AN ‘ELECTRICAL’PROBLEM AND A HEART ATTACK IS A ‘CIRCULATION’ PROBLEM. कार्डियक अरेस्ट के बारे में हम दूसरे पोस्ट में विस्तार से बात करेंगे…..

कार्डियोवैस्कुलर (CVD) यानी दिल से जुड़े रोग लोगों की मौत के प्रमुख कारण हैं। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) के 2019 वर्ष के आंकड़ों के अनुसार दिल के रोगों से लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हुई है। जो दुनिया भर में होने वाली मौतों का 32 फीसद है। इस आंकड़े में चिंता का विषय इस बात पर है की इसमें से 85 प्रतिशत मौतें दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुए हैं।

आज के समय में खासकर कोविड महामारी के बाद यह एक सामान्य समस्या बन गई है। वर्तमान समय में इस बीमारी ने न केवल बुजुर्ग बल्कि युवाओं को भी दिल के दौरे पड़ने से मौत की खबर सामने आने लगी हैं। वैसे दिल का दौरा पड़ने का पूरा जिम्मा कोरोना पर ही नहीं थोपा जा सकता। वास्तव में, हम भी इसके बराबर के हकदार हैं। हम आज तला भुना खाने-पीने के इतने आदि हो गए हैं की हमारी जीवनशैली में ज़हर घुलने लग गया है। ऐसे में कई ऐसे आहार जो की हम मात्रा से ज्यादा या बिना शरीर से तारतम्यता बनाए खाते हैं वहीं इन जैसे घातक बीमारियों को आपके शरीर में घर बनाने की जगह देती हैं। ऐसा नहीं है की आप बाहर का न खाएं या बिलकुल ही दुनिया से अपने आप को काट लें बल्कि, आपको इन दोनो के बीच एक बैलेंस बना कर रखने की जरूरत है।

किसी को दिल का दौरा या हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय की मांसपेशियों के किसी भाग को पर्याप्त ब्लड या रक्त या खून नहीं मिलता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज दिल के दौरे का मुख्य कारण है। इसके चलते मरीज के खून की नसों में गंभीर ऐंठन या ब्लॉकेज या संकुचता यानी सिकुड़न होने लगता है, जिसके कारण हृदय की मांसपेशियों में खून का प्रवाह थम सा जाता है।

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ऐसे में कहा जाए तो दिल का दौरा रक्त के प्रवाह में अवरोध आने के कारण होता है और दिल को क्षति पहुंचाता है। इसका एक कारण धमनियों में प्लेक या कहें अवरोधक या मलबा जमा हो जाना भी है जिसके लिए मुख्य जिम्मेदार आपकी जीवनशैली और आपके जेनेटिक प्रोब्लम भी हो सकते हैं।

प्लेक जैसे जैसे आर्टरी या veins में जमा होता जाता है वैसे वैसे हृदय तक रक्त का पहुंचना मुश्किल होता जाता है। ये आगे चलकर हृदय की मांसपेशियों को खराब कर देता है। इसी स्थिति को कोरोनरी धमनी रोग कहा जाता है और ये दिल के दौरे का एक मुख्य घटक है।

क्या दिल का दौरा(HEART ATTACK) आने के पहले कोई लक्षण दिखाई देता है

यह कहना संभव नहीं है की दिल का दौरा आने से पहले कोई लक्षण दिखाई दे। परंतु, अगर आपको बिना मौसम या बेवजह मिचली या उल्टी आए, माथे पर चिंता की लकीरें आएं, आप पसीने-पसीने हो रहे हों, सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही हो या त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे और ये सब जल्दी एक अंतराल में हो रहा हो तो अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें, क्योंकि ये दिल के दौरे का सूचक हो सकता है। ऐसे मामलो को हल्के में लेना जीवन से हाथ धोना हो सकता है।

एक बात हमने इस प्रश्न के उत्तर के शुरुआत में ही दे दिया था कि इसका कोई भी निश्चित समय नहीं होता। यह कभी भी आपको घेर सकता है। कई बार तो यह कोई संकेत भी नही देता ऐसे में इसे साइलेंट इश्चिमिया भी कहा जाता है। इसके तहत खून का दिल तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो जाता है पर त्वरित व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती है।

हार्ट अटैक(HEART ATTACK) की मुख्य वजह

हार्ट अटैक के मुख्य कारण आज के वर्तमान समय में हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और मोटापा होता है। वहीं अगर आप किसी तरह का शारीरिक श्रम या गतिविधि नहीं करते हैं या अपने शरीर को हिलाना डुलाना भी नहीं करते हैं तब भी हार्ट अटैक की संभावना रहती है। ऐसा देखा गया है की बहुत से लोग डॉक्टरों से सलाह लेकर दवा खाकर ठीक तो हो जाते है परंतु, कुछ लोग जो इस बीमारी से गंभीर रूप से घिरे हैं उन्हें एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के द्वारा सही करने का प्रयास किया जाता है।
एंजियोप्लास्टी और स्टेटिंग:- यह एक ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक ब्लड सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाओं को खोला जाता है। मेडिकल भाषा में इन रक्त वाहिकाओं को कोरोनरी आर्टरीज कहा जाता है। 

कोरोनरी आर्टरीज डिजीज अगर गंभीर स्थित में हैं, तो सबसे पहले एजियोप्लास्टी की प्रक्रिया अपनाई जाती है । इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाले ब्लड वेसल जिस जगह पर संकरे या रुकावट होती है, वहां तक कैथेटर के जरिए एक बलून कैथेटर पहुंचाया जाता है।

A Catheter is a thin tube made from medical grade materials serving a broad range of functions. Catheters are medical devices that can be inserted in the body to treat diseases or perform a surgical procedure.                                                              कैथेटर एक पतली ट्यूब है जो मेडिकल ग्रेड सामग्री से बनी होती है जो कई प्रकार के कार्य करती है। कैथेटर वह चिकित्सा उपकरण हैं जिन्हें बीमारियों के इलाज के लिए या शल्य प्रक्रिया करने के लिए शरीर में डाला जा सकता है।

इसके बाद एक महीन तार(wire) के जरिए एंजियोप्लास्टी कैथेटर को हल्का सा हिलाया दुलाया जाता है, ताकि बलून रोधक जगह पर पहुंच सके, जहां खून की आपूर्ति पूरी होने में समस्या बन रही है। एक बार स्थान पर पहुंच जाने पर बलून को ब्लड वेसल की अंदरूनी दीवार को दबाने के लिए फुलाया जाता है।

जब अंदुरूनी दीवार दब जाती है और खून जाने का रास्ता साफ हो जाता है तब बलून कैथेटर को पिचकाकर शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है।

आज कल बंद आर्टरी को खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी के दौरान ही ब्लड वेसल में बलून कैथेटर के द्वारा स्टेंट भी डाल दिया जाता है। इसमें बलून को फुलाया जाता है ताकि स्टेंट ब्लड वेसल के अंदुरूनी दीवार में सटीक बैठ जाए। एक बार स्टेंट फिट हो जाने पर बलून को पिचकाकर बाहर निकाल लिया जाता है। स्टेंट उसी जगह पड़ा रहता है और दिल तक खून पहुंचने का मार्ग एकदम साफ हो जाता है।

स्टेंट:- आयुर्विज्ञान में एक कृत्रिम उपकरण को कहा जाता है जो शरीर के प्राकृतिक मार्ग/नाली में रोगग्रस्त प्रवाह अथवा संकुचन को रोकने के लिए या प्रक्रिया देने के लिए प्रयुक्त होता है। इस शब्द का संदर्भ अस्थाई रूप से उपयोग की जाने वाली नलिका के रूप में भी किया जा सकता है।

बाईपास सर्जरी:- मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सीने, बाह या सीने में छोटी सी सर्जरी करके एक स्वास्थ्य ब्लड वेसल निकाल ली जाती है। इसके बाद ग्राफ्टिंग के मदद से ब्लड वेसल का प्रयोग दिल तक खून पहुंचाने के लिए एक नए रास्ते के तौर पर किया जाता है। एक बार जब नए रास्ते से दिल तक पर्याप्त मात्रा में खून पहुंचने लगता है, तब एंजाइना और हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक तल जाता है। ऐसे मरीजों को लो फैट भोजन करने की सलाह दी जाती है। अगर डॉक्टर ने खाने के लिए कोई दवा बताई है, तो बगैर उसकी सलाह के दवा खाना बंद नहीं करना चाहिए।

एंजाइना:- A type of chest pain caused by reduced blood to the heart. यह एक प्रकार का सीने का दर्द है जो कि, दिल तक कम खून या रक्त पहुंचने के कारण होता है। Angine is a system of Coronary(महाधमनी) artery(धमनी) Disease.

दिल के मरीजों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि, वह अपने डॉक्टर को अन्य और अपने शरीर से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताएं और सेवन करने वाले दवाओं को भी उजागर करें। याद रखें शराब का सेवन आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। जबकि अपने डॉक्टर की सलाह लेकर आप योग कर के अपने सेहत को अच्छा बना सकते हैं।

Heart attack Symptoms In Men And Women

Men….. Lighteadedness, shorten of breath, chest pain and discomfort, Neck Back Or Jaw Pain, Discomfort or Pain in arms or shoulder, Nausea Or vomiting.

Women ….. Lighteadedness dizziness or fainting, Shorten of breath, pain or numbness in one or both arms, Back Or Jaw Pain, Cold sweating, Nausea Or vomiting, Lightheaded or unusually tired.

Unlike with cardiac arrest, the heart attack usually does not stop beating during a heart attack. The longer the person goes without treatment, the greater the damage. 

हार्ट अटैक(HEART ATTACK) आने पर क्या करना चाहिए?

यदि आप पक्के नहीं है की यह हार्ट अटैक(HEART ATTACK) है, फिर भी आपको अपने लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल कर के इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ को बुला लेना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्येक क्षण कीमती है। अगर इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ (EMS) के आने में देरी हो रही है। तब, ऐसे में आप कार या कोई सुविधाजनक वाहन का प्रयोग कर जल्दी अस्पताल पहुंच सकते हैं। वहीं अगर EMS STAFF जल्दी आ जाते हैं तो और अच्छा हो सकता है क्योंकि वे हार्ट अटैक के कारण अगर दिल धड़कना बंद हो जाता है तो वे उसे रिवाइव करने में ट्रेंड होते हैं।

मरीज, जिन्हें सीने में दर्द हो रहा हो अगर वे सीधे हॉस्पिटल पहुंचते हैं या फिर एंबुलेंस के मदद से पहुंचाए जाते हैं, उन्हें अच्छा और तेज इलाज मिल सकता है।

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