उत्पाद सेवा गारंटी योजना और पत्रकारिता

सबसे पहले तो ये जान लें कि उपभोक्ता है तो उत्पाद है और उत्पाद है तो वस्तुएं हैं… ऐसे में सब को एक साथ समझना जरूरी है।

उत्पाद सेवा गारंटी योजना और पत्रकारिता
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उपभोक्ता कौन है?

उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं को खरीदते हैं या प्राप्त करते हैं।( यहां उन उपभोक्ताओं की बात नही कर रहे जो आवश्यकता से ज्यादा खर्च करते हैं अगर इस मुद्दे पर जाएंगे तो मुद्दा अलग हो जाएगा)।

वस्तुएं:- यह वह वस्तु है जो एक आम नागरिक जरूरतों के लिए खरीदते हैं। हम चाहे किसी भी उम्र, सामाजिक आर्थिक या शिक्षा स्तर रखते हों. परंतु प्रतिदिन अपने इस्तेमाल का कोई न कोई सामान खरीदते और उसका इस्तेमाल करते रहते हैं। इनमें प्रत्येक दिन प्रयोग होने वाली वस्तुएं जैसे दूध, सब्जी, कॉपी, साबुन, आदि से लेकर कभी कभी खरीदने वाली वस्तुएं भी शामिल कर लेते हैं। जैसे की कपड़ा, फर्नीचर, बिजली के उपकरण आदि। वहीं कई चीजे वस्तुओं में ऐसी भी होती हैं जो केवल एक बार खरीदी जाती है जिसमें दुकान,मकान और गाड़ी जैसी चीजे शामिल होती हैं।

सेवाएं:- यह वे वस्तुएं हैं जो विभिन्न संस्थाओं या सरकार के द्वारा मुफ्त या पैसा लेकर या अदा कर के ली जाती हैं। जैसे की पानी,बिजली, शिक्षा, यातायात, दूरसंचार, मनोरंजन आदि।

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उत्पादक:- उत्पादक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने वाला व्यक्ति, संस्था या संगठन होता है।

अब बात करते हैं उत्पाद सेवा गारंटी योजना की

‘ उत्पाद सेवा गारंटी योजना’ के अंतर्गत उपभोक्ता को उत्पाद के प्रति आकर्षित करने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के आकर्षक ऑफर व विशेष छूट दिए जाते हैं, यह एक प्रकार से कहा जाए तो उपभोक्ता या कहें गैर उपभोक्ता को किसी उत्पाद या वस्तु को खरीदने के लिए विवश किया जाने वाला कार्य है, ताकि वे उनके वस्तुओं को खरीदें। इसके लिए कंपनिया कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखते हुए कार्य करती हैं…. जो की निम्नलिखित हैं….

  • अधिक सेवाएं देना
  • फ्री होम डिलीवरी
  • EMI
  • सर्विसिंग
  • उन्मुक्त बाजार व्यवस्था
  • भूमंडलीकरण

इन सभी के माध्यम से एक ब्रांड अपनी शाख बनाने का प्रयास करते हैं ताकि बाजार में उनके प्रोडक्ट या दी जानी सेवाओं को लोग जाने और उसके उपभोक्ता या उपयोक्ता बनें।

उत्पाद सेवा गारंटी योजना के अंतर्गत विशेषतः उपभोक्ताओं की संतुष्टि का विशेष ध्यान रखा जाता है।

आखिर ऐसा किया क्यों जाता है

  • बाजार में छवि निर्मित करने के लिए
  • उत्पाद को उपयुक्त संसाधनों के प्रयोग से बड़ा चढ़ा कर प्रचार प्रसार करना ताकि उनके उत्पाद के लोग आकर्षित हों
  • अपने प्रतिस्पर्धियों को मात देने के लिए
  • विशेष प्रकार के लुभावने व आकर्षक ऑफर देकर वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री बड़ाने के लिए। उदाहरण के लिए भारतीय सिनेमा वर्तमान में यही नुक्स अपना रहे हैं।

उत्पाद तथा सेवा गारंटी योजना के प्रति मीडिया की क्या भूमिका होती है?

उत्पाद तथा सेवा को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अहम होती है, क्योंकि ज्यादातर उत्पाद उपभोक्ता द्वारा उनका विज्ञापन देखकर ही खरीदा जाता है। उपभोक्ताओं को मीडिया द्वारा दिखाए गए विज्ञापनों या समाचारों पर ज्यादा प्रभाव और विश्वास होता है, वही अन्य माध्यमों में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ज्यादा भरोसा होता है।

ऐसे में मीडिया का स्वरूप अधिक स्वच्छ और प्रमाणिक समझा जाता है।

  • वर्तमान में मीडिया उत्पाद कंपनियों की सहयोगी बनकर कार्य कर रही है।
  • ऐसे में मीडिया द्वारा उत्पादों के बारे में सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक विषयों को दिखाया जाता है।
  • आज मीडिया एजेंसी लगभग 40 से 60 फीसद या इससे भी ज्यादा विज्ञापनों से जुड़े होते हैं जिनसे उन्हें अधिक लाभ होता है।

मीडिया द्वारा उपभोक्ता का पक्ष आखिर कितना?

अगर सीधी बात की जाए तो मीडिया के द्वारा उपभोक्ताओं के पक्षों को लगभग ना के बराबर दिखाया जाता है, मीडिया को टीआरपी चाहिए होती है इसलिए वह ज्यादातर ऐसे मामलों को नहीं दिखाते हैं। वे इन खबरों के बजाय अपराध, दुष्कर्म, लूटपाट तथा भड़काऊ खबरों को दिखाना अधिक पसंद करते हैं। जबकि मीडिया को इसके विपरीत उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों के बारे में भी दिखाना चाहिए।

गारंटी आखिर है क्या?

जब किसी वस्तु या सेवा पर उपभोक्ता को गारंटी मिलती है, तो इसका मतलब है कि अगर वह सामान तय समय के अंदर खराब हो जाए तो कंपनी या दुकानदार को उस खराब हुए उत्पाद के बदले नया उत्पाद देना होगा। कहने का तात्पर्य है कि गारंटी के तहत दुकानदार या कंपनी आप को खराब प्रोडक्ट के बदले नया प्रोडक्ट देने के लिए बाध्य है। उदाहरण के लिए अमेजॉन और फ्लिपकार्ट से अगर कोई डिफेक्टिव पीस आपके पास आ जाए तो आप उसे तय समय में बदल सकते हैं बशर्ते वह उनके टर्म्स एंड कंडीशन को फॉलो करता हो।

वारंटी क्या है?

जब आपको किसी उत्पाद पर वारंटी मिलती है तो यह एक तरह से विक्रेता की ओर से किसी ग्राहक को दी जाने वाली विशेष छूट है। जिसमें किसी प्रोडक्ट के खराब होने पर दुकानदार या कंपनी उसी खराब हुए उत्पाद को ठीक कर कर के आपको वापस लौटा देगी।

कहने का तात्पर्य है कि किसी उत्पाद पर वारंटी दी गई है तो आप उस उत्पाद के खराब होने पर उसे एक निर्धारित समय तक दुकानदारी कंपनी से निशुल्क ठीक करा सकते है।

गारंटी व वारंटी प्राप्त करने की शर्तें

  • ग्राहक के पास खरीदे गए प्रोडक्ट का पक्का बिल हो या फिर गारंटी कार्ड हो।
  • गारंटी की एक समय सीमा रहती है और इस गारंटी पीरियड के खत्म होने से पहले दुकानदार या कंपनी खराब प्रोडक्ट को बदलेगी इसके खत्म होने के बाद नहीं।

वारंटी

  • ग्राहक के पास खरीदे गए प्रोडक्ट का पक्का बिल हो या फिर वारंटी कार्ड हो।
  • वारंटी कार्ड पर विक्रेता के हस्ताक्षर और मोहर लगी हुई हो।
  • वारंटी भी एक तय सीमा तक ही होती है।

गारंटी वारंटी का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता के पास सामान का पक्का बिल होना जरूरी है। यह होने के बाद भी कंपनी सामान बदलने से मना करते हैं तो उपभोक्ता द्वारा कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019

भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनियों के साथ – साथ विज्ञापन करने वाली हस्तियों को भी दंड का भागी बनाया जा सकता है, ऐसा प्रावधान उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019 के द्वारा किया गया है।

  • इस विधेयक का मकसद उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार से होने वाले नुकसान से बचाना है।
  • वैश्वीकरण और बाजारीकरण के इस दौर में विज्ञापन का प्रभाव समाचार पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन के साथ-साथ डिजिटल मीडिया में भी तेजी से बढ़ रहा है।
  • इस विधेयक के द्वारा उन भ्रामक विज्ञापनों पर लगाम लगाया जा सकेगा जो अभी तक धड़ल्ले से चलाए जा रहे थे।
  • इस अधिनियम में यह नियम भी बनाया गया कि नकली सामान बनाने पर निर्माता का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
  1. इससे उपभोक्ताओं को मजबूती मिलेगी
  2. ई-कॉमर्स भी दायरे में रहेंगे
  3. उपभोक्ताओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति से पारदर्शिता बढ़ने का अनुमान।

निष्कर्ष

उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए कानून के द्वारा उन्हें पूर्ण रूप से संरक्षण दिया गया है। लेकिन सभी उपभोक्ताओं को इनकी जानकारी नहीं होती है क्योंकि उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए उत्पादन दाता अपनी वस्तुओं की बिक्री के लिए झूठे विज्ञापन बनाते या बनवाते और प्रसारित करवाते हैं।

छोटी-छोटी वस्तुओं के विज्ञापनों के लिए फिल्मी कलाकारों द्वारा उस वस्तु का प्रचार प्रसार किया जाता है ताकि उपभोक्ताओं में वस्तुओं के प्रति विश्वसनीयता को बनाया जा सके। इसके अलावा गारंटी, वारंटी व कुछ विशेष छूट के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जाता है। इसी के साथ उत्पाद सेवा गारंटी योजना के अंतर्गत मीडिया की भूमिका को देखें तो । उपभोक्ताओं को मीडिया द्वारा दिखाए गए विज्ञापनों यह समाचारों पर ज्यादा विश्वास होता है बजाय अन्य माध्यमों के।

इसलिए मीडिया का स्वरूप अधिक स्वच्छ और प्रमाणिक समझा जाता है। लेकिन देखा जाए तो मीडिया इसके विपरीत उत्पाद कंपनियों की सहयोगी बनकर कार्य कर रही है। मीडिया द्वारा उत्पादों की सिर्फ सकारात्मक विषयों को ही प्रदर्शित किया जाता है। वैसे कहा जाए तो मीडिया का दायित्व है देश के उपभोक्ताओं उनके उत्पाद से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक करना। लेकिन इसके विपरीत मीडिया संस्थान अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उपभोक्ताओं के समक्ष उत्पादों के बारे में गलत व झूठी खबरों को ज्यादा दिखाते हैं।

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