mansa musa

आज के वर्तमान समय में जब अडानी, अंबानी, एलन मस्क और जेफ बेजोस जैसे अमीर इंसान के ऊपर पूरे दुनिया की निगाहें टिकी हुई होती हैं और इन्हें विश्व के सबसे अमीर इंसानों में से गिना जाता है. ऐसे में इतिहास के पन्नों में दर्ज सबसे अमीर आदमी की बात न की जाए ऐसा हो नहीं सकता है.

मंसा मूसा का जन्म आज से लगभग 740 वर्ष पहले अफ्रीका के किसी अंजान स्थान पर सन 1280 में हुआ था. मूसा लगभग 57 साल यानी 1337 तक जिंदा रहे. इन्होंने लगभग 33 वर्ष की उम्र में अबू बकर द्वितीय के मृत्यु के बाद साल 1312 में माली सम्राज्य के बागडोर को अपने हाथ में लिया.

मूसा को मंसा नाम की उपाधि कब मिली

मूसा का पूरा नाम मूसा कीटा प्रथम है और इनको मंसा की उपाधि माली के तख्त पर बैठने के बाद मिली. मनसा के अर्थ की बात करें तो मंसा का तात्पर्य सुल्तान, विजेता, सम्राज्य और बादशाह से है. मूसा के सम्राज्य को देखें तो यह वर्तमान के रिटोनिया, सेनेगल, गांबिया, बुर्किना फासो, माली, नाइज़र, चाट और नाइजेरिया इस सम्राज्य के अंग थे.

मूसा कितने अमीर थे

मूसा के अमीरीयत के बारे में यह बात चर्चा में है कि वह उससे भी ज्यादा दौलतमंद थे जितना कोई व्यक्ति उनके बारे में एक अनुमान लगा सकता है. ऐसे में माना जाता है कि मूसा पूरे दुनिया का सबसे अमीर आदमी था जिसके पास अकूट मात्रा में धन संपदा थी. एक अनुमान के मुताबिक उस समय मूसा के पास 4 लाख मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर की संपत्ति थी जो की भारतीय रुपये में देखें तो लगभग 29 लाख करोड़ रुपए बनता है.

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मूसा के इतने अमीर होने का क्या कारण था

“इतिहास का सबसे अमीर आदमी” मनी मैगजीन में कुछ इन्हीं लफ़्जो के साथ शुरू होता है( बीबीसी हिंदी वेबसाइट से साभार)

अब बात करते हैं कि मंसा मूसा इतने अमीर कैसे हो गए..जबकि एक तरफ यूरोपीय देश संसाधनों की कमी के कारण गृह युद्ध की चपेट में थे. वहीं दूसरी तरफ माली का स्वर्णिम युग चल रहा था. लेकिन यहाँ एक तथ्य है जो पच नहीं रहा… ऐसा कैसे हो सकता है कि लगभग संपूर्ण विश्व पर राज करने वाला यूरोप इस बात से अछूता रहा! सोचने वाली बात है…

खैर उसने सम्राज्य में ऐसा क्या किया कि मूसा का नाम इतिहास में दर्ज हो गया.. सबसे पहले एक बार फिर जान लें कि मूसा अफ्रीकन रीज़न के जिस क्षेत्र में शासन करता था, वहाँ नमक और सोने के प्राक्रितिक खाने मौजूद थी और यह उस राज्य सबसे बड़ा उत्पादक राज्य भी था. इसी के साथ मूसा के शासन काल में पूरे विश्व में सोने की माँग का बड़ना भी इसके अमीर होने का एक कारण हो सकता है. एक अनुमान के मुताबिक उस समय एक वर्ष के अंतराल में लगभग एक हजार किलो सोने का उत्पादन किया जाता था.

वहीं मूसा के शासन काल में इस सम्राज्य का फैलाव पश्चिमी अफ्रीका के एक बड़े भूखण्ड तक हो गया था. जिसके अंतर्गत एटलांटिक महासागर से के तट से लेकर टिम्बक्टू और सहारा रेगिस्तान तक सम्राज्य फैल चुका था. ऐसे में जब क्षेत्र बड़ा तो इसके व्यपार में भी प्रगति हुई. उसके अमीर होने का एक प्रमाण यह भी है कि उसकी सेना में दो लाख सैनिक शामिल थे, जिसमें से केवल 40 हजार तीर अंदाज थे. इतनी बड़ी संख्या में सेना रखना आज के बड़े-बड़े देशों के भी बस की बात नहीं है और मूसा उस समय में ऐसी सेना रखते थे तो यह दिखाता है कि वह कितने अमीर थे.

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कैसे हुए मंसा मूसा प्रसिद्ध

सन 1324 तक मूसा को कोई नहीं जानता था. लेकिन जब वे इस साल हज़ के लिए रवाना हुए तो वह अकेले नहीं थे बल्कि उनके साथ उनका पूरा एक काफिला था जो उनके साथ चल रहा था. बेहतरीन फारसी रेशम के कपड़े पहने हाथ में सोने की छड़ी पकड़े लगभग 500 लोगों का दस्ता आगे चल रहा था और एक हजार सैनिक और गुलाम शामिल थे. इसी के साथ 80 ऊँटों का जट्टा जिसमे, प्रत्येक ऊँट पर लगभग 136 किलो का सोना लदा हुआ था. जिस रास्ते से उनका यह जट्ठा गुजरता वहाँ देखने वालों की भीड़ लग जाती. उनका ये जट्ठा जब मिश्र की राजधानी काहिरा से गुजरने लगा तो मंसा मूसा को बहुत गरीबी दिखी. जो कि वह देख नहीं पाए ऐसे में उन्होने उस रास्ते पर आने वाले सभी लोगों को सोने के सिक्के खुले हाथों से दान कर दिए. वहीं कहीं-कहीं उन्होने सोने के सिक्के भी बिखेर दिए.

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मिश्र के लोगों ने इससे पहले कभी भी इतना ज्यादा दौलत नहीं देखी थी. ऐसे में बेसुमार दौलत मिलने के कारण वहाँ के गरीब रातों रात अमीर हो गए. जिसके चलते वहां के महगाई ने आसमान छू लिया क्योंकि अब वहां कोई भी गरीब नहीं रह गया था. उसके बाद इक दशक से भी अधिक समय तक मिश्र के लोगों पर माल्यिन सम्राट का प्रभाव यहाँ बना रहा.

हज यात्रा से लौटने के बाद मूसा ने माली में कई मस्जिदो का निर्माण करवाया. वहीं एक महत्वपूर्ण शहर होने के कारण टिम्बक्टू में मूसा ने स्कूल, विश्वविद्यालय, पुस्तकालय और मस्जिदें भी बनवाईं. मक्का के यात्रा के बाद ही अफ्रीका के बाहर मूसा का नाम प्रसिद्ध हुआ. इस समय तक बाकी देशों को भी मूसा के रईसी का अनुमान लग चुका था. वहीं यूरोप के लोगों तक जब ये किस्सा पहुंचा तो उन्हें इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ…. जब तक उन्होंने मूसा को अपनी आंखों से देख नहीं लिया.

जब मूसा के धवक की पुष्टि यूरोप के लोगों को हो गई तब उन्होंने उस समय के महत्वपूर्ण नक्शे कैथलन एटलस पर माली सम्राज्य और उसके राजा मंसा मूसा का नाम शामिल किया. हम आपको बता दें कि केथलस एटलस वह नक्शा है जिसमे वह सभी जगह शामिल हैं जहाँ यूरोपियन लोग घूम चुके हैं. मूसा को 14वीं शताब्दी के नक्शे में स्थान देते हुए उसे एटलस नक्शे में सोने के राजसिंहासन पर बैठे हुए दिखाया गया है जिसमें उसने सोने की मुकुट और हाथ में सोने का एक ग्लोब पकड़े हुए दिखाया गया है. जिससे यह जानकारी मिलती है कि यह इंसान कितना अमीर था और सोने का कारखाना था.

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माली सम्राज्य

माली सम्राज्य की बात करें तो यह 1230 से लेकर1670 ई. तक रहा था. साल 1337 में जब मंसा मूसा की मृत्यु के बाद मगन मूंसा उस सम्राज्य के राजा बने, लेकिन वह मंसा मूसा के महत्वता को बरकरार रखने में या उनके सम्पत्ति के रुटबे को कामयाब नहीं रख पाए.

टिंबकूट का जिंगारेबेट मस्जिद मवनसा मूसा के दौर में बनी मस्जिदों में से एक है जो आज भी मौजूद है.

REFERENCES

By Admin

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