NordVPN ने अपने सारे सर्वरों को भारत से 26 जून से बंद करने को कह दिया है। NORDVPN का यह फैसला देश की साइबर सुरक्षा निर्देश के बाद आया है। NordVPN से पहले एक्सप्रेस वीपीएन और सर्फशार्क भी भारत से अपने सर्वरों को समेट चुके है। इन तीनो कंपनियों ने नए गाइडलाइन्स, साइबर सिक्योरिटी डायरेक्टिव फ्रॉम द इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम(CERT-In) के बाद यह फैसला लिया है।

SOURCE:- INDIATODAY.IN

दरअसल, सरकार ने अपने एक फैसले में कहा है कि VPN कंपनियों को यूज़र्स का 180 दिन का लॉग का रिकॉर्ड रखने के साथ पांच वर्षों तक डेटा सुरक्षित रखना होगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को देना होगा। जिसको लेकर कंपनियों से आपत्ति दर्ज करवाई थी।

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NordVPN ने आपत्ति जताते हुए पहले ही यह बात कही थी कि यदि सरकार अपने फैसले को बदलती नहीं है और उसपर कायम रहती है इसी के साथ उन्हें दूसरा विकल्प नहीं देती है तो उसे भारतीय बाजार से अपने बिजिनेस को समेटने पर मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने सीधे कहा कि सरकार के इस फैसले में वे योगदान नहीं दे पाएंगे।

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NordVPN ने एक बयान में कहा कि, 'अतीत में, समान नियम आमतौर पर सत्तावादी सरकारों द्वारा अपने नागरिकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करने के लिए पेश किए गए थे और अगर लोकतंत्र उसी रास्ते का अनुसरण करता है, तो यह लोगों की गोपनीयता के साथ-साथ उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इस कानून का लोगों की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।"

नॉर्डवीपीएन ने अपने सर्वरों को भारत से हताने पर क्या कहा है?

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पनामा की कंपनी नॉर्डवीपीएन ने कहा कि, नियमों की लॉगिंग और स्टोरेज आवश्यकता की वजह से, ‘भारत में सर्वर वाली एक वीपीएन कंपनी अब अपने उपयोगकर्ताओं के लिए गोपनीयता की गारंटी नहीं दे सकती है’। कंपनी की तरफ से जो बयान जारी किया गया है, उसमें कहा गया कि, कंपनी इस बात को लेकर चिंति है, कि इस रेग्यूलेशन की वजह से लोगों के सुरक्षित डेटा पर असर पड़ सकता है। कंपनी ने कहा कि, ‘ऐसा लगता है कि सैकड़ों या हजारों विभिन्न कंपनियों के पास लोगों की निजी जानकारियों की भारी मात्रा में वृद्धि होगी और यह कल्पना करना कठिन है, कि सभी, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के पास लोगों की निजी जानकारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उचित साधन होंगे’।

NordVPN की सेवा आगे भी जारी रहेगी

जानकारी के लिए बता दें कि वीपीएन को लेकर बना यह नया कानून भारत में 28 जून से प्रभावी हो रहा है| NordVPN ने इस कानून को मानने से इंकार कर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब NordVPN की सेवा बंद हो जाएगी| नॉर्डवीपीएन के यूजर्स नए आईपी एड्रेस के साथ उसकी सेवाओं का लाभ आगे भी लेते रहेंगे| दरअसल अन्य कंपनियों की तरह ही नॉर्डवीपीएन भी वर्चुअल सर्वर का इस्तेमाल करेगी और भारतीय यूजर्स को भारतीय IP एड्रेस मिलेगा|
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दूसरे वीपीएन प्रोवाइडर्स ने क्या कहा?

पिछले हफ्ते, सुरफशार्क ने अपने सर्वरों को भारत से हटा लिया है और उसने भी यही दलील दी थी, कि साइबर सुरक्षा नियम कंपनी की “नो लॉग्स” नीति के “मूल लोकाचार के खिलाफ जाते हैं”। इससे पहले, एक्सप्रेसवीपीएन ने यह कहते हुए अपने सर्वरों को देश से हटा दिया था कि, यह “इंटरनेट स्वतंत्रता को सीमित करने के भारत सरकार के प्रयासों में भाग लेने से इनकार करता है”।

वीपीएन को लेकर क्या हैं नियम?

सीईआरटी-इन द्वारा 28 अप्रैल को जारी दिशा-निर्देशों में वीपीएन सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ डेटा सेंटर और क्लाउड सेवा प्रदाताओं को नाम, ई-मेल आईडी, संपर्क नंबर और आईपी पते जैसी जानकारी संग्रहीत करने के लिए कहा गया है। अन्य बातों के अलावा, अपने ग्राहकों की पांच साल की अवधि के लिए सारी जानकारियों को जमा करके रखने के लिए कहा गया है। वहीं, सरकार ने कहा है कि, वह चाहती है कि इन विवरणों के जरिए साइबर अपराध से लड़ने में मदद मिलेगी। लेकिन, वीपीएन कंपनियों का कहा है कि, ये कदम वीपीएन प्लेटफार्मों द्वारा प्रदान किए गए गोपनीयता कवर का उल्लंघन होगा। हालांकि, इन चिंताओं के बावजूद, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पहले कहा था कि, वैसी वीपीएन कंपनियां, जो देश के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, वो देश से बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत सरकार का नया नियम 27 जून से लागू हो रहा है।

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वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क क्या होता है?

वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) एक ऐसा नेटवर्क होता है जो कि आपके डाटा को एंक्रिप्ट करता है और आपके IP ऐड्रेस को भी छिपाता है| ऐसे में आपकी इंटरनेट की पहचान दुनिया से छुपी रहती है| आप किसी कंप्यूटर या मोबाइल पर क्या सर्च कर रहे हैं, क्या कर रहे हैं, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं मिलती है, जबकि ओपन नेटवर्क में जब भी आप कुछ सर्च करते हैं तो तमाम तरह की साइट कूकिज के जरिए आपकी जानकारी ले लेती हैं और उसका इस्तेमाल आपको विज्ञापन दिखाने में करती हैं|  वीपीएन का इस्तेमाल करने से आपकी ट्रैकिंग भी नहीं हो सकती है| वीपीएन का इस्तेमाल आजकल ठगी और क्राइम के लिए भी होने लगा है जिसे रोकने के लिए सरकार तरह तरह के कानून बना रही है|

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