मनोरंजन एक ऐसी कला है जो रोते हुए को हँसा दे और हस्ते हुए को रुला दे। बहुत कम लोग होते है जिन्हें लोगों का मनोरंजन करने में महारत हासिल होती है। ऐसा नहीं है कि जिसको मनोरंजन करने नहीं आता वो मनोरंजन नहीं कर सकता। मनोरंजन कराने वाला को और मनोरंजन नहीं कराने वाला को भी मनोरंजन की जरूरत पड़ती है।

जब से जीवन का विकास हुआ है तबसे लेकर अब तक मनोरंजन किसी भी जीवित प्राणी के मन की शांति के लिए महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। ये बात अलग है कि अलग-अलग जीव जंतु अलग अलग प्रकार से अपने मैसेज को प्रेषित करते हैं, उनके कहने का ढंग मानव जैसे प्राणी को समझ नहीं आ सकता पर इसका मतलब ये नहीं कि वे मनोरंजन नहीं करते, बस उनके तरीके उनके हिसाब से होते हैं। पर मानव के लिए मनोरंजन कितना जरूरी है इस पर हम बात करेंगे।

मन की शांति के लिए मनोरंजन एक अच्छा आहार

आज के इस भागती-दौड़ती दुनिया में शायद ही किसी के पास किसी के लिए वक़्त हो जहाँ वे किसी व्यक्ति की बाते शायद ही सुनें और उसपर प्रक्रिया दें। ऐसे में मन की शांति के लिए मनोरंजन एक सर्वोत्तम आहार है। उदाहरण के लिए 2020 में आए कोविड के लहर ने पूरे संसार को घर के अंदर रहने के लिए सबको मजबूर कर दिया। सब बेशक घर मे थे पर मन भविष्य की चिंताओं को लेकर अशांत था। ऐसे में उस समय रामायण, महाभारत, श्री कृष्णा जैसे धार्मिक कार्यक्रम चलाए गए और वही बच्चों के लिए शक्तिमान जैसे धारावाहिक कार्यक्रम भी उतारे गए।

इसके अलावा कई ऐसे कार्यक्रम सरकार के द्वारा चलाये गए जो लोगों के मन की शांति के लिए सही हो और उनका मनोरंजन करता हो।

मनोरंजन की परिभाषा अपने शब्दों में लें तो…. यह एक ऐसी क्रिया है जिसमें सम्मिलित होने वाले को आनंद आता है एवं मन शांत होता है। मनोरंजन सीधे भाग लेकर हो सकता है या कुछ लोगों को कुछ करते हुए देखने से हो सकता है।

दूसरी परिभाषा मनोरंजन की समझे तो… मनोरंजन एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमे मनुष्य के ध्यान को भटकाने का प्रयास किया जाता है, जिसके फलस्वरूप मनुष्य के मस्तिष्क का न्यूरॉन आनंदित महसूस करता है। असल मे मनोरंजन एक केमिकल लोचा है जो कि दिमाग को थकान से निकालने में कारगर हो सकता है।

मनोरंजन जिंदगी को सार्थकता की तरफ ले जाता है

मनोरंजन के बिना मन शांत हो जाना संभव नहीं है। मानव एक प्राणी है न कि मशीन, वैसे मशीनों की भी समय-समय पर शट डाउन किया जाता रहता है, फिलहाल हम तो मनुष्य हैं। एक उदाहरण से समझ सकते हैं कि एक मनुष्य अगर अकेला किसिस रूम या किसी जगह पर रहता है तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है, उसका मन किसी भी परिवेश में नहीं टिकता, वहीं एक तरफ बात-चीत करने वाला व्यक्ति, घूमने वाला व्यक्ति बहुत अच्छे से अपना मनोरंजन करता है। यही कारण है कि नेटफ्लिक्स, गूगल जैसी कंपनियां अपने यहाँ कार्य करने वालों को बहुत ज्यादा छूट देती काम मे।

मनोरंजन जितना आसान शब्द है उसे समझना उतना ही मुश्किल है। इसे अंग्रेज़ी में एंटरटेनमेंट भी कहा जाता है। वहीं मनोरंजन को फन भी कहा जाता है। जहाँ आप भौतिक दुनिया मे जूझ रहे तनावों को खत्म कर सकते हैं।

मनोरंजन प्रत्येक आयु वर्ग के लिए अलग अलग मतलब रखता है

हर वर्ग, हर आयु के लिए मनोरंजन का मतलब एक समान नही होता है। मसलन एक 2 से 3 साल के बच्चे के लिए मनोरंजन के तत्व उसके आस पास के समान, पर्यावरण, हो सकते हैं पर एक युवा वर्ग के लिए मनोरंजन राजनीति, मार-काट, कोई नई फिल्म हो सकती है वहीं बुजुर्ग व्यक्ति के लिए भक्ति, सोहर या नाटक जैसे तत्व मनोरंजन हो सकते हैं। कहने का तात्पर्य है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आयु कितने साल की है और आप रुचि किसमे लेते हैं।

आज का युग डिजिटल युग है जहाँ लगभग सभी के हाथों में स्मार्टफोन आ गए हैं। वैसे तो स्मार्ट फ़ोन उपयोक्ताओं को साथ लाने और ज्ञान-विज्ञान, समाचार को त्वरित जानने का और मनोरंजन का एक अच्छा साधन है पर यह धीरे-धीरे शराब की तरह आपको अपने गिरफ्त में न ले-ले इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए और तनाव ग्रस्त होने पर अपने नजदीकी या फिर फैमिली डॉक्टर से अवश्य ही संपर्क करना चाहिए ताकि भविष्य में आप किसी भी संभावित खतरे से बच सकें।
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