दो कार्टून एक 1935 का जर्मनी और एक आज का हमारा प्यारा भारत। कार्टून का संदर्भ अहमदाबाद बम ब्लास्ट केस में अदालत ने आतंकवादियों को फांसी की सजा सुनाई है।

जर्मनी के भूत के बारे में हम जानते है मगर क्या भारत का वर्तमान भी जर्मनी के भूत की तरफ बढ़ रहा है? जब देश की सबसे बड़ी और सत्ताधारी पार्टी ही इस तरह के कार्टून अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पब्लिक के बीच शेयर करती है तो हम ऐसा क्यों न सोचें ? क्या ये खुली नफरतब की उद्घोषणा नही है ? प्रधानमंत्री किस मुंह से आपसी सौहार्द की बात करते है जब उनकी ही पार्टी के सोशल मीडिया प्रभारी आधिकारिक तौर पर इस तरह के पोस्ट की स्वीकृति देते है। प्रधानमंत्री का सभी देशवासियों से प्रेम को खोखला साबित करता ये कार्टून क्या यही भारत का भविष्य होगा? क्या इससे पहले भारत मे किसी भी अपराध में किसी अपराधी को फाँसी नही हुई है?क्या वो हिन्दू या सिख नही थे?

अपराधी का कब से धर्म से वास्ता होने लगा। वो कौन से धर्म को मानते है उनका तो बस एक ही धर्म होता है नफरत,अपराध और अशान्ति।

उस आदमी को बस एक धुन सवार रहती है
बहुत हसीं है दुनिया इसे कैसे ख़राब करूँ

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हालांकि वो ये काम किसी न किसी धर्म का सहारा लेकर ही करते है। फिर चाहे गुजरे हुए कल के जर्मनी में यहूदी हो या कश्मीर में हिन्दू या भागलपुर में मुसलमान या दिल्ली – पंजाब में सिख।
ये सभी सीधे सादे प्रेम और शांति से अपने धर्म को मानने वाले लोग किसी न किसी अधर्मी के हाथों मारे या सताए गए। किन किन क़ातिलों का मज़हब ढूंढेंगे हम। तभी तो कहते है दंगाइयों आतंकवादियों का कोई मज़हब नही होता।

तो फिर देश की सबसे बड़ी पार्टी ऐसे धार्मिक चित्रात्मक कार्टून से किसकी तरफ इशारा कर रही हैं?

देश पिछले कुछ सालों से नफरत की पतली महीन गलियों से गुज़र रहा है , आये दिन जब मामूली सी बात पर मुसलमानों की मॉब लिंचिंग (भीड़ के द्वारा हत्या) हो रही है ऐसे में प्रधानमंत्री को चाहिए था एक वीडियो मेसेज के द्वारा देश के नाम संबोधन जिसमे आपसी मुहब्बत की अपील की जाती। जिसका यूट्यूब चैनल से लेकर टीवी पर प्रसारण होता। मगर वो ऐसा नही करेंगे क्यों कि मुहब्बत उनका चरित्र नहीं है ना कभी रहा है अगर होता तो क्या वो अपने भूतकाल में हुई घटना होने देते। नही कभी नहीँ

प्रधानमंत्री भारत का एक गौरवान्वित और संवैधानिक पद है, जिसका प्रयोग अपने निजी जीवन के लाभ के लिए नहीं करना चाहिए | वो देश मे कहते है हम तो गरीब आदमी है और दस लाख का सूट पहन कर विदेश जाते है। वो मुस्लिम औरतों को उनका हक दिलाने की बात करते है मगर जब उन्ही औरतो का उनकी पार्टी के सदस्य सोशल मीडिया पर चरित्र हनन करते है तो वो खामोश रहते है यहाँ तक के उनको ट्विटर फॉलो भी करते है। वो भारत के संविधान पर शपथ लेते है मगर जब कोई देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करता है तो उस पर चुप्पी साधे रहते हैं।

मगर ये देश ऐसे चुपड़ी बातो से पिघलने वाला नही है ये सुन्दरता और मुहब्बत करने वाले लोगों से भरा हुआ पूरी दुनिया मे बेजोड़ देश है। कोई भी राजनीतिक पार्टी चाहे कितनी भी कोशिश करले वो, पल भर के लिए आज भले कामयाब हो जाए मगर उसका कल अपना वजूद नही बचा पाएगा। उसकी ज़हरीली सियासत इस देश की हवा खुद में नही घुलने देगी।


इसीलिए भारत में प्रेम का वर्तमान भले ही संकट में हो मगर भारत का भविष्य कभी भी जर्मनी का भूत नही बनेगा।
मुझे विश्वास है क्यों कि मैं इसी मिट्टी में पला हूँ मैंने इसी हवा में साँस ली है। बुरे वक़्त की भी एक अच्छी बात होती है, वो भी गुज़र जाता है।

ऑथर मोहम्मद शादान अयाज़ द्वारा एस पोस्ट को लिखा गया है|

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Opinion expressed in above post is authors personal opinion.

By Admin

One thought on “कई घंटों के फजीहत के बाद पोस्ट तो हटा लिया पर दाग कैसे हटेगा”

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