जिस प्रकार से पिछले 2 दशकों में संचार क्रांति हुई है और जिस प्रकार से मीडिया का दायरा बड़ा है वह शायद ही किसी से अनजान हो, ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि बीते समय में इंटरनेट एक ऐसा कारक रहा है जिसने समाचारों को सीधे-सीधे लोगों तक पहुँचाने का काम किया है और उनसे दूसरे लोगों तक अपना समाचार या उनके बगल हो रही घटनाओं, कार्यक्रमो आदि को दूसरे तक प्रेषित करने का कार्य किया है। इस प्रकार से जनसंचार माध्यमों का परिदृश्य बदलना स्वाभाविक ही था और इसके चलते दर्शक शोध एक केंद्र बिंदु बनकर सामने आया जिसने इस(किस विषय) समस्या का काफी हद तक निदान कर दिया।

आज देखा जाए तो दुनिया भर के, लगभग सभी बड़े मीडिया संगठनों और घरानों ने किसी-न-किसी रूप में अपने चैंनलों के लिए आंतरिक यानी उनके लिए लक्षित समूहों पर शोध यानी रिसर्च करने में लग गए हैं और रिसर्च कर रहे हैं। रिसर्च को अगर मार्केटिंग की भाषा में समझा जाए तो यह एक प्रकार से ‘मार्केटिंग रिसर्च’ है जिसके अंतर्गत मीडिया अपने सामग्री के लिए बाजार को ढूढती है। मीडिया रिसर्च करने का मुख्य कारण यह है कि कोई भी मीडिया organization यह नहीं चाहता है कि उसके संसाधन किसी गलत क्षेत्र में लगें और वे इन गलत क्षेत्रों में दाव लगा कर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार लें। इसका एक कारण प्रतिस्पर्धा भी है जिसमें अगर आप साथ नहीं दौड़े तो आप पीछे रह जाएंगे और पीछे रहने वाले को कोई नहीं देखता है। दूसरे शब्दों में यह एक प्रकार से घोड़े की दौड़ की तरह है जिसमे आपका तेज दौड़ना ही आपको सर्वश्रेष्ठ बनाता है।

अब कोई भी मीडिया संगठन इस रेस में पीछे तो नहीं रहना चाहता हाँ आगे अगर नही जा पा रहा तो बराबरी पर तो हर हाल में रहना चाहता है। ऐसे में सभी टीवी प्रसारण टीम द्वारा ऑडिएंस रिसर्च टीम का निर्माण किया जाता है जिसका मुख्य काम होता है कि वह प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों पर एक रिपोर्ट बनाए और उसको प्रसारण कार्यालय तक पहुँचाए ताकि, उन्हें वह अपने लक्षित समूह, खंड, क्षेत्र तक आसानी से अपने कार्यक्रम को प्रेषित कर सकें और लाभ प्राप्त हो सके।

PIC CREDIT TO: KURVE.CO.UK

अब इसके लिए रिसर्च टीम कुछ हथकंडों को फॉलो करती है जो निम्नलिखित है:-

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  • लोग उनके कार्यक्रमों को देख रहे हैं या नहीं?
  • क्या जो ऑडियंस उनके कार्यक्रमों को देख रही है उसपर अपनी रुचि ले रही है या नहीं?
  • Audience उस कार्यक्रम से संतुष्ट है या नहीं?
  • कितने लोग उनके कार्यक्रम को देख रहे हैं?
  • संबंधित कार्यक्रम के लिए टारगेट ऑडियंस कौन हो सकता है?

टेलीविज़न ब्रॉडकास्टिंग में दर्शक शोध(Research) क्या है?

टेलिविज़न ब्रॉडकास्टर को दर्शक शोध से यह पता चल पाता है कि उनके द्वारा बनाए गए कार्यक्रम या पैकेज को कौन देख रहा है और वे उसे किस रूप में देख या सुन रहे हैं…. इस शोध से यह पता लगाने में सहायता मिलती है कि लक्षित दर्शक तक पहुचने की आपके संस्थान की क्षमता कितनी है। असल मे यह एक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत आपके और आपके समुदाय की रुचि को जानने का प्रयास किया जाता है की वे टीवी प्रसारण से क्या चाहते हैं।

टेलीविजन कार्यक्रम को डिजाइन करने में श्रोता अनुसंधान किस प्रकार सहायता करता है?

Audience Research से लक्षित दर्शको की जरूरतों, परीक्षणों और उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप, कार्यक्रम की योजनाओं को डिज़ाइन करना और संशोधित करने का काम किया जाता है। यह एक प्रकार से समाचार/टीवी उत्पादकों को, प्रतिक्रिया या इंग्लिश में फीडबैक(feedback) प्रदान करता है।

इसके अलावा, यह प्रायोजकों को, विज्ञापनदाताओं को और विपणको(marketers) को उनके व्यावसायिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्यक्रम की रेटिंग या श्रोता डेटा भी देता है।

टीवी कार्यक्रमों को बनाने में दर्शक शोध किस, प्रकार से महत्वपूर्ण है?

मीडिया का कार्य लोगों को अपने कार्यक्रमों द्वारा संदेश पहुँचना और उनके मन मे चल रही बातों या संसय को खत्म करना है। श्रोता तक पहुँचना मीडिया का लक्ष्य है… मीडिया दर्शकों के लिए वे कार्यक्रम, वे डेटा प्रस्तुत करना चाहते हैं जिसको दर्शक देखना पसंद करते हैं और उन जानकारियों को देखना ज्यादा प्रेफर करते हैं जो उनका मनोरंजन करती हैं या उनको उसी से संबंधित सूचना देती हैं।

एक सारांश के रूप में कहें तो trp के होड़ में बने रहने के लिए ऐसा करना जरूरी है। आज हर विज्ञापनदाता trp रेटिंग या viewership देख कर ही विज्ञापन देता है। सब लाभ कमाने के होड़ में हैं यह बात सही है पर किस तर्ज पर किस कसौटी पर यह समझना जरूरी है।

By Admin

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