श्री नंदा प्रस्थी जी का जन्म ओडिसा के जाजपुर जिले के कंतिरा गाँव मे हुआ था, जोकि पिछले 75 वर्षों से बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य कर रहे थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण, उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी और अपने पिताजी को आर्थिक स्थिति में मदद करने में लग गए थे। उन्होंने सिर्फ सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी।

श्रीमान नंदा प्रस्थी, एक अच्छी नौकरी करने के लिए कटक में अपने मामा के घर आना चाहते थे, लेकिन अपने घर की स्थिति को देखकर अपने पिताजी के साथ खेतों में काम करने का प्रयास किया। जिसके बाद उन्होंने बच्चों को शिक्षित करने का प्रण लिया।

पद्मश्री नंद किशोर प्रस्थी जी ने स्वयं 75 वर्षों तक बच्चों को पढ़ाने की बीड़ा उठाया लेकिन किसी बच्चे से फीस पढ़ाने के संदर्भ में फीस नहीं ली।

पद्म पुरस्कार विजेता नंदा प्रस्थी जी की 104 साल की उम्र में 7 दिसंबर 2021 को मृत्यु हो गई । उनकी मौत की खबर सुनकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई जाने-माने लोगों ने अपने शोक संवेदना को व्यक्त किया। आज नंदा सर के तौर पर चर्चित नंदा प्रस्थी, किसी भी परिचय के मोहताज नहीं है।

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