Day: 28 October 2021

Lesson to learn from Ronny Bhaiya (Amazon Prime)

Dream Big:- Never let your present stop you to dream big for you future. “मेरी औकात मेरे सपनों से इतनी बार हारी है न कि अब उसने बीच में बोलना ही बंद कर दिया है।” Never run away from your problem (समस्याओं से पीछा छुड़ा कर मत भागो उसका सामना करो):- “अपन ने जीवन में …

Lesson to learn from Ronny Bhaiya (Amazon Prime) Read More »

समाचार के स्त्रोत

समाचार के मुख्यतः दो तरह के स्त्रोत होते हैं, पहला प्रत्यक्ष और दूसरा अप्रत्क्षय। प्रत्यक्ष स्त्रोत वे स्त्रोत हैं, जिसमें मीडिया के कर्मचारियों को सूचना सीधे प्राप्त हो जाती है, उदाहरण के लिए:- राजनेताओं के गतिविधियां, राजकीय विभाग से संबंधित कोई सूचना, सरकारी जनसंपर्क विभाग आदि।वहीं अप्रत्क्षय स्त्रोत वे स्त्रोत हैं, जिसमें सरकारी विभाग के …

समाचार के स्त्रोत Read More »

ग्लोबल मीडिया के अंतर्गत वैश्विक सूचना प्रवाह का स्वरूप

वैश्विक स्तर पर मौजूद सूचना तंत्र ग्लोबल मीडिया कहलाता है। ज्यादातर लोगों को इन मुद्दों के बारे में अखबारों, पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन, और वर्ल्ड वाइड वेब की रोजमर्रा के समझ से बनती है, जिस तरह से डिजिटल व ऑनलाइन सूचना तंत्र का प्रसार हो रहा है, उससे इसमें नैतिकता व सर्वमान्य शिष्टाचार का बंधन भी …

ग्लोबल मीडिया के अंतर्गत वैश्विक सूचना प्रवाह का स्वरूप Read More »

नियामक सिद्धान्त क्या है? इसके विभिन्न सिद्धान्तों का वर्णन

किसी देश व समाज के संचार माध्यमों को समझने के लिए उस देश व समाज की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था, भौगोलिक परिस्थिति तथा जनसंख्या को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके अभाव में संचार के माध्यमों का विकास व विस्तार संभव है। इस संबंध में संचार विशेषज्ञ फ्रेडरिक सिबर्ट, थियोडोर पिटर्सन तथा विलबर श्राम ने 1956 …

नियामक सिद्धान्त क्या है? इसके विभिन्न सिद्धान्तों का वर्णन Read More »

Jansanchar madhyamo ki janmat nirman me bhoomika

प्रत्येक समाज के सामाजिक जीवन में जनमत अर्थात जनता के मत का महत्वपूर्ण स्थान होता है। जब भी लोगों के ‘आचार’, ‘व्यवहार’, और रवैये में परिवर्तन की बात आती है तो प्रायः जनमाध्यम की भूमिका पर बल दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि किसी भी नीति को धारण करने या अपनाने के लिए …

Jansanchar madhyamo ki janmat nirman me bhoomika Read More »

वर्तमान संदर्भ में समाचार पत्रों एवं टेलीविज़न कार्यक्रमों की प्रस्तुति की समीक्षा

वर्तमान संदर्भ में समाचार पत्रों एवं टेलीविजन के कार्यक्रमों का स्वरूप बदल गया है आजादी से पहले पत्रकारिता एक मिशन हुआ करती थी परंतु वैश्वीकरण के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में नए बदलाव देखने को मिले हैं, जो आज वर्तमान समय में अधिक लोकप्रिय हैं। समाचार पत्रों की अगर हम बात करें तो दिन प्रतिदिन …

वर्तमान संदर्भ में समाचार पत्रों एवं टेलीविज़न कार्यक्रमों की प्रस्तुति की समीक्षा Read More »

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.