संपादकीय नीति

प्रत्येक समाचार पत्र के अपनी एक नीति होती है, एक रूप रेखा होती है जिसको समक्ष रखकर समाचार लेखक आगे बढ़ता है, सीधे शब्दों में कहे तो संपादकीय नीति वह नीति है जो किसी समाचार पत्र विभाग के लेखको के लिए एक रोड मैप बना कर देती है, ताकि वे अपना कार्य बिना किसी आशंका या संबंधित विभाग के तहत कर सकें। इस नीति के तहत खबर में भाषा का प्रयोग कैसे होगा, किस प्रकार की हैडिंग जाएगी, संबंधित खबरों में कौन से रंग का प्रयोग किया जाए, किस खबर को कितनी प्रमुखता देनी है आदि आता है। इस नीति के बनाने का मुख्य अभिप्राय अपने अखबार को दूसरे अखबार से किस प्रकार अलग व आकर्षित दिखाने से भी है।

स्टाइल शीट (पुस्तिका)

समाचार पत्र किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए ले-आउट के संबंध में कुछ नियम बना लेते हैं। ये नियम समाचार पत्र के सभी पृष्ठों पर एकरूपता लाते हैं तथा उसे एक विशेष पहचान देने का कार्य भी करते हैं। इन्हें समाचार पत्र के स्टाइल के नाम से जाना जाता है। इन्हें आमतौर पर स्टाइल शीट या स्टाइल बुक में कोड देकर सुरक्षित रखा जाता है।

स्टाइल शीट के तय नियमों पर चलने से समाचार पत्र की भाषा स्पष्ट , संक्षिप्त तथा अनियमितताओं से मुक्त हो जाती हैं। जो समाचार पत्र के लिए सबसे आवश्यक होते हैं। इस तरह के नियम बना देने के बाद पाठक को ऐसी चीजें पढ़ने को नहीं मिलेंगी कि, किसी खबर में वायदा लिखा हो और दूसरी खबर में वादा। चुँकि स्टाइल शीट में यह निर्धारण कर लिया जाता है कि किसी के नाम के साथ श्री लगेगा या नहीं, और यह नियम पूरे समाचार पत्र पर लागू कर दिया जाता है। इसी प्रकार कई शब्द को दो प्रकार से लिखे जा सकते हैं तो उसको भी स्पष्ट कर दिया जाता है, कि कौन सा शब्द कौन से अवस्था मे प्रयोग में लाया जा सकता है।

अमेरिका की बात करें तो वहाँ एसोसिएटेड प्रेस और यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल ने वहाँ के अधिकतर समाचार पत्रों के लिए जो स्टाइल रूल की स्थापना कर रखी है उसे आज भी सभी समाचार पत्र आज भी मानते हैं। इसी प्रकार देखें तो ऐसे नियम लगभग सभी समाचार संगठन बना लेते हैं। भारत में भी आकाशवाणी , दूरदर्शन सहित अन्य सभी प्रमुख अखबारों की अपनी स्टाइल बुक या स्टाइल शीट होती है।

स्टाइल शीट में पहचान के बारे में दिशा निर्देश होते हैं इसमें धर्म, मौत की ख़बर, प्राकृतिक आपदा, विवाद आर्थिक समाचार, प्रतिशत और संख्या, खेल, पर्यायवाची आदि के बारे में स्पष्ट निर्देश होते हैं, कि क्या प्रयोग किया जाएगा या क्या नहीं। इस तरह की निर्देशिका बना देने के बाद समाचार-पत्र में एकरूपता आना तय ही है।

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