दोस्तों आज हम इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं कि माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है? आपने देखा ही होगा कि जब घरों में कोई त्यौहार, शादी या पूजा का समय होता है तो इसकी शुरुआत व्यक्ति को, तिलक लगाकर की जाती है| पूजा के दौरान व्यक्ति को तिलक लगाया जाता है क्योंकि तिलक लगाना शुभ माना जाता है, मगर क्या कभी आपने कभी सोचा है माथे पर तिलक लगाने का कोई और कारण भी हो सकता है? हम आपको बताते हैं, दरअसल माथे पर तिलक लगाना हिंदू धर्म की एक पहचान होती है और ये देवी-देवता के समय से चली आ रही परंपरा है| माथे के बीच में बीच तिलक तब लगाया जाना ज्यादा शुभ तब माना गया है जब सुबह दिनचर्या शुरू करने से पहले आप भगवान का ध्यान करें और भगवान को चन्दन लगाकर अपने माथे पर तिलक लगाया जाए |ये हल्दी, सिंदूर, केसर, भस्म और चंदन आदि के रूप में हो सकता है|

माथे पर तिलक लगाने की प्रथा आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है युद्ध में जाते समय राजा महाराजा भी तिलक लगाकर ही युद्ध में जाते थे आज भी हमारे सैनिक जब युद्ध में जाते हैं तो उन्हें भी तिलक लगाकर उनकी सफलता की कामना की जाती है जब भी कोई मेहमान घर से प्रस्थान करता है तो उनकी यात्रा मंगलमय हो, ऐसी कामना करते हैं। साथ ही उन्हें तिलक लगाकर विदा किया जाता है| भारतीय संस्कृति में माथे पर तिलक लगाना शुभ संकेत माना जाता है, दरअसल हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं। जिनमें अपारशक्ति के भंडार होता है, इन्हें चक्र कहा जाता है और हमारे मस्तिष्क के बीच में आज्ञा चक्र होता है| इस चक्र पर हमारे शरीर के तीन नाडी ऎडा पिंगला आकार के रूप में मिलती हैं।

इसलिए इस स्थान को हमारे शरीर का अहम स्थान माना जाता है और इसे गुरु स्थान भी बोला जाता है क्योंकि यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है और यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी होता है| इस स्थान को शांत रखने के लिए चंदन का तिलक लगाया जाता है, चंदन नियमित रूप से लगाया जाए तो सिर दर्द जैसी समस्या नहीं होती है| वही योग में ध्यान के समय इसी स्थान पर मन के एकाग्र किया जाता है | वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे दिमाग में हमेशा सेराटोनिनव Betandarpin नामक रसायन निकलते रहते हैं जो हमारे शरीर को खुशी प्रदान करते हैं, तिलक लगाने से इन रसायनों का संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि माथे पर तिलक लगाया जाता है।

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