हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य करने,पूजा-पाठ करने आदि कार्यों के करने के दौरान शंख बजाने की प्रथा रही है, लेकिन क्या आपको पता है कि एक बद्रीनाथ ही ऐसा मंदिर है जहाँ कभी भी शंख नही बजाया जाता है, जिसके पीछे यह मान्यता विख्यात है कि माँ लक्ष्मी जब तुलसी के रूप में बद्रीनाथ धाम में तपस्या कर रही थी, तो उसी दौरान भगवान विष्णु ने शंखचूड़ राक्षस का वध किया था। माँ लक्ष्मी को शंखचुड़ राक्षस का ध्यान न हो, इस कारण से यहाँ शंख नहीं बजाया जाता है।

एक मान्यता यह भी है कि जब केदार नाथ इलाके में महर्षि अगस्त्य निवाश कर रहे थे जिसके डर से आतापी और बतापी राक्षस वहाँ से भाग गए थे। जहाँ आतापी मंदाकिनी नदी में और बतापी बद्रीनाथ धाम में शंख के अंदर जाकर छिप गया था। ऐसा कहा जाता है कि शंख को बजाने से ये दोनों ही राक्षस बाहर आजायेंगे।

वहीं वैज्ञानिकों का बद्रीनाथ के संदर्भ में मानना है कि बद्रीनाथ में शंख क्यों नहीं बजाया जाता, जिसके पीछे का कारण वहाँ के इलाके को बताते हैं क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा बर्फ से ढका रहता है और शंख से निकली ध्वनि पहाड़ो से टकरा कर प्रतिध्वनि पैदा करती है। जिसकी वजह से बर्फ में दरार पड़ने व बर्फीले तूफान आने की आशंका बनी रहती है।

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