यह बात आपको अचंभित कर सकती है पर बता दें कि जींस का आविष्कार मजदूरों के लिए किया गया था। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा काम करने की वजह से मजदूरों के कपड़े अक्सर हट जाया करते थे। साल 1850 तक जीन्स बहुत अपने मजबूती की वजह से मशहूर हो गए थे लेकिन जीन्स में अभी भी एक समस्या थी वह यह कि जींस की जेबें बहुत जल्दी फट जाया करती थी।

उस समय जींस का ज्यादातर इस्तेमाल मिलों, फैक्ट्रियों, खदानों में काम करने वाले मजदूरों, द्वारा किया जाता था। ऐसे में उनके द्वारा कड़ी मेहनत और जेबों में टूल्स रखने के चलते या तो जेब फट जाया करते थे या उनकी सिलाई खुल जाया करती थी।

इसी के चलते जैकब डेविस नाम के दर्जी ने एक बार जींस में बटन लगा दिया। इससे यह लाभ देखने को मिला की जींस अब मजबूती के साथ साथ सुंदर भी दिखने लगा था। साल 1870 में जैकब दर्जी ने इसे पेटेंट करवाने की कोशिश की, लेकिन उसके पास पेटेंट के लिए लगने वाली बड़ी राशि नहीं थी। इसके बाद उसने लगभग 3 साल बाद लेवी कंपनी के साथ एक समझौता किया और लेवी कंपनी ने इसे अपने नाम पर पेटेंट करवा लिया।

आपको बता दें कि इस साल 1880 में यह पेटेंट पब्लिक हो गया और अब इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता था। हमारी जींस में देखे तो आज तक इसी प्रथा का पालन करते हुए छोटे-छोटे बटन लगे होते हैं।

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