सोशल मीडिया ने जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। इंटरनेट आधारित यह तकनीक बहुत तीव्र गति से देश दुनिया के कामकाज और व्यवहार को बदल रही है। मनुष्य जीवन की निर्भरता दिनों दिन इंटरनेट आधारित तकनीक तंत्र सोशल मीडिया पर बढती जा रही है। भारत सरकार का 2016 में डिजिटल इंडिया का अभियान इसी दिशा में एक कदम है। वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना में इंटरनेट आधारित तकनीक और सोशल मीडिया , इससे संघर्ष और बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे, समय जब , परंपरागत माध्यम पत्र-पत्रिकाएं तक घर पहुँचने में दिक्कत का सामना कर रहीं हैं, तो जानकारियों के लिए लोग का टीवी और सोशल मीडिया पर निर्भर होना स्वाभाविक ही है।

भारत में सामाजिक स्तर पर सोशल मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कहा जाता है कि सोशल मीडिया की दुनिया गोल नहीं है वरन फ्लैट है, समतल है, जिसमें सभी एक ही कतार में खड़े हैं। यहाँ कोई विशिष्ट या आम आदमी नहीं है। जो एक बार सोशल मीडिया का नागरिक हो गया उसे दूसरे किसी अन्य यूज़र्स की तरह ही स्वतंत्रता और अधिकार मिल जाते हैं।सही मायने में सामाजिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक भागीदारी के कारण सूचनाएं अब ज्यादा पारदर्शी एवं तीव्र गति से सोशल मीडिया में विद्यमान हैं। समाज में भय, डर, खौफ़, अराजकता, अफरातफरी या अन्य कोई समस्या उत्पन्न न हो इसलिये सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर समाज को जानकारियां उपलब्ध करवा रही हैं।

सोशल मीडिया आम शासन प्रशासन , व्यापार , शिक्षा , मनोरंजन और आपदा प्रबंधन आदि जीवन के सभी क्षेत्रों को न केवल प्रभावित करता है बल्कि तीव्र गति से उन्हें परिवर्तित भी कर रहा है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने भारतीय समाज के वंचित तबके को एक मंच और स्वर प्रदान किया है। परंपरागत माध्यमों में अक्सर इस वंचित और हाशिये के समाज, जिसमें स्त्री, दलित , आदिवासी, व अन्य समाज के पिछड़े हिस्से के व्यापक जनसमूह की समस्याएं और आकाक्षाएं या तो दबा दी जाती रही हैं या उन्हें महत्व नहीं दिया गया। उनके लिए सोशल मीडिया ने एक ऐसा मंच तैयार किया, जहाँ वे प्रधानमंत्री से लेकर ,दुनिया के किसी भी भाग के व्यक्ति से बात कर सकते हैं और भावनाएं साझा कर सकते हैं।

सोशल मीडिया को,वंचित शोषित समाज ने भेदभाव, असमानता ,विषमता और शोषण के विरुद्ध एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया है। गाँव, कस्बे, छोटे शहर और महानगरों में इन वर्गों की सोशल मीडिया की उपस्थिति और प्रतिरोध जबरदस्त रहा है। शासन प्रशासन, इससे न केवल अवगत हैं बल्कि समाज के इन वर्गों तक पहुचने और उनके समस्याओं के निवारण के लिए सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता , जवाबदेही और उपस्थिति बड़ा दी है ताकि सरकारी कार्यकलापों और नीतियों से सभी वर्गों को जोड़ा जा सके।

आज सोशल मीडिया शिक्षा , साहित्य, प्रशासन ,व्यापार , खेल व अन्य गतिविधियों की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध करा रहा है। युवाओं के लिए सोशल मीडिया ने कौशल विकास से लेकर पैसा कमाने तक के अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं। अपनी रचनात्मकता, प्रतिभा के बल पर अनेक युवा सोशल मीडिया के बिजनेस मॉडल का फायदा उठाकर पैसा भी कमा रहे हैं। इसमें गाना, फिल्में, ब्लॉग्स, यूट्यूब चैनल आदि आते हैं जिसपर शायद ही कोई युवा अनुपस्थिति हो। ब्लॉग्स, यूट्यूब ने कमाई करने का जो बिजनेस मॉडल बनाया है ,उसमें अनेक युवा ट्रेवल, स्वास्थ्य , फिटनेस ,खान-पान व मनोरंजन संबंधी का उत्पादन कर कमाई भी कर रहे हैं।

सोशल मीडिया ने किशोर और युवा वर्ग को तकनीक और संचार कौशल से अवगत कराने का कार्य भी किया है। वे सोशल मीडिया के माध्यम से देश दुनिया और अपने आस पास के परिवेश को बेहतर तरीके से समझने और उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए सक्रीय होने लगे हैं। मुद्दा चाहे राजनीत का हो, सामाजिक हो ,सांस्कृतिक हो, खेल या विदेश से जुड़ा हो, या कोई अन्य मुद्दा हो ,वे बेहिचक सक्रियता से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। जिससे उनमे सम्प्रेषण कला और संचार कौशल का विकास भी होता है । यह बात अलग है कि कुछ युवा इस अभिव्यक्ति के साधन को अराजकता के रूप में इस्तेमाल भी करने लगते हैं और फिर ट्रोल आर्मी या किसी अन्य के हिस्से बन जाते हैं।

किसी भी मुद्दे पर सामाजिक अभियान चलाने और उससे दबाव बनाने में सोशल मीडिया एक कारगर औजार साबित हुआ है। याब वायरल खबरों, वीडियो और ट्विटर ट्रेंडिंग का शासन प्रशासन पर न केवल असर पड़ने लगा है बल्कि उनका संज्ञान लेकर उसपर कार्यवाही भी की जाने लगी है।समाज के स्तर पर भी इसका असर व्यापक तौर पर देखने को मिलता है।

सोशल मीडिया के दुरुपयोग की खबरे भी अक्सर आती रहती हैं। सोशल मीडिया को लेकर कई ऐसे अध्ययन भी हुए जिनमे बताया गया है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स के अनियंत्रित और अत्यधिक इस्तेमाल से किशोर एवं युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा है। इसमें अतिरिक्त याददाश्त में कमी , चिंता , तनाव , और अवसाद जैसी मानसिक परेशानियां भी शामिल हैं। सोशल मीडिया में इसके दुरपयोग को लेकर सबसे ज्यादा शिकायत है वह, अभिव्यक्ति की अराजकता को लेकर के है। बिना सोचे समझे नियम कानूनों का परवाह किये बिना लगातार ऐसी सामग्री सोशल मीडिया साइट्स पर डाल दी जाती हैं जो आपराधिक या गैरकानूनी के श्रेणी में आती हैं।भारत में निरंतर बड़ रहे साइबर अपराधों के पीछे यह एक बड़ा कारण है कि यह सामग्री किसी भी रूप में वैधानिक प्रावधानों, नियमो , और कानून सम्मत नहीं होती।

कई बार ऐसा भी देखने मे आया है कि कोई फेसबुक पोस्ट, ट्विटर ,टेक्स्ट या यूट्यूब वीडियो के चलते हिंसा, मारपीट या तनाव की घटनाएं आन खड़ी होती हैं।कई बार राजनीतिक निहितार्थों या धार्मिक सामाजिक साधुवधिता के कारण भी तनाव व विभाजनकारी सामग्री को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाता है जिससे, आमतौर पर असमाजिक तत्वों द्वारा बखूबी अंजाम भी देने को, देखने को मिलता है।जिससे हिंसा, भेदभाव आदि घटनाएं होने की संभावना में वृद्धि होने की शंका हमेशा बनी रहती है।

सोशल मीडिया के दुरुपयोग की घटनाओं में पिछले वर्ष न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च हमले के, फेसबुक लाइव काफी चर्चा में रही थी। इस अतंकी हमले को 17 मिनट तक लाइव चलाया गया था और बाद में अनेक माध्यमो के द्वारा भी इस वीडियो को शेयर किया गया था।(उदाहरण)

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