दोस्तों हम सबको पता है कि कोरोना वायरस के चलते किए गए लॉकडाउन में दिल्‍ली मेट्रो आम जनता के लिए बंद कर दी गई थी पर अब दिल्ली की स्थित सही होते देख दिल्ली सरकार दिल्ली मेट्रो को खोले जाने को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है लेकिन अभी भी यह संदेह बरकरार है कि अनलॉक के नए दिशानिर्देशो के आने से पहले क्या दिल्ली मेट्रो खुलेगी या इसपर और चर्चा होना बाकी है….लोगों का इसपर क्या प्रक्रिया है, दोस्तों ऐसे कई प्रश्न है….जिसे अभी जानना बाकी है….

पर अभी सबसे बड़ा सवाल तो यही उठ रहा है कि क्या कोरोना संक्रमण के दौरान दिल्ली मेट्रो चलाना सही होगा??

क्या जनता मेट्रो का सफर बिना डरे कर पायेगी ??

तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं क्योंकि मेट्रो का चलना लोगों से ज्यादा मेट्रो के लिए जरूरी होने लगा है।

हमने देखा दोस्तों की पिछले पांच महीनों से दिल्ली मेट्रो बंद है।जिसके बंद होने से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के लिए ऋण का भुगतान करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है और delhi metro rail corporation को इस संबंध में केंद्र सरकार से गुहार लगानी पड़ रही है। हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि
डीएमआरसी को दिल्ली मेट्रो के निर्माण के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जिका) ने ही बेहद कम ब्याज दर पर ऋण मुहैया करवाया था जो ऋण अभी भी चरणबद्ध तरीके से दिया जा रहा है।

डीएमआरसी इस ऋण को हर साल समय से भुगतान कर रही थी पर बीते पांच महीनों से मेट्रो बंद होने की वजह से ऋण का भुगतान करना असंभव हो गया है।

इसके संदर्भ में अगर अधिकारियों की बात माने तो अधिकारीयों का कहना है कि…”मेट्रो एक राष्ट्रीय संपत्ति है अगर इसका संचालन नहीं हुआ तो देश के लिए समस्या हो जाएगी. दिल्ली मेट्रो किश्तों में लोन लेती है. एक किश्त का दस साल बाद भुगतान शुरू हो जाता है. पहले हम छह-आठ महीनों में किश्त का पैसा निकाल लेते थे लेकिन अब तो करीब पांच महीनों से मेट्रो ही नहीं चल रही है.”

“डीएमआरसी को रोज़ाना लगभग 10 करोड़ रूपये का नुक़सान हो रहा है. दिल्ली मेट्रो पर जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी का लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये का ऋण है.”

दोस्तों यहाँ एक बात यह जान लेना जरूरी है कि DMRC के ऋण की गारंटी सरकार द्वारा दी जाती है। अगर DMRC इस ऋण का भुगतान नहीं कर पाई तो केंद्र सरकार को इसकी भरपाई हर हाल में करनी पड़ेगी।

लेकिन, अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ देखें तो केंद्र सरकार ने DMRC से कह दिया है कि वह विभिन्न परियोजनाओं के लिये जापान इंटरनेशनल कोरपोरेशन एजेंसी से लिये गये जो भी कम ब्याज दर वाले कर्ज़ हैं उसे चुकाने के लिये वो दिल्ली सरकार से मदद ले।

इसी के साथ अब सवाल उठता है कि आखिर इस ऋण का भुगतान कौन करने वाला है??

दिल्ली सरकार या फिर केंद्र सरकार?

दोस्तों अगर हम बात करें भारत मे मेट्रो की तो दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू और लखनऊ जैसे शहरों में भी मेट्रो हैं पर हम ये भी देखते हैं कि, सबसे ज़्यादा मेट्रो का विस्तार और यात्री परिचालन दिल्ली में ही है । और अभी मेट्रो के न होने से दिल्ली में फिलहाल बसों को सीमित यात्री संख्या के साथ चलाने की इजाजत तो है पर मेट्रो जैसी सुविधा नहीं है, ऐसे में यह कहा जाना उचित ही है कि सार्वजनिक परिवहन के ना चलने से सड़कों पर चार पहिया वाहनों की संख्या ने लोगों को डिप्रेशन में डाल दिया है और अभी दिल्ली मेट्रो बंद है जिसके कारण बाजार और ऑफिस के खुलने पर भी लोगों की कम संख्या देखने को मिल रही हैं। जिससे एक बात तो साफ है कि दिल्ली मेट्रो सिर्फ़ दिल्ली वालों के लिए ही नहीं बल्कि NCR से दिल्ली से आने-जाने वालों के लिए भी बेहद खास जरिया के रूप में अपनी भूमिका निभाता है ।

एक जानकारी के मुताबिक देखे तो दिल्ली मेट्रो में रोज़ाना करीब 60 लाख लोग सफर करते हैं और अब दिल्ली मेट्रो का चलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दिल्ली मेट्रो के बंद होने से लोगों को आने जाने में जो दिक्कतें हो रही है वो तो है ही पर इसके साथ साथ पर्यावरण पर भी इसका असर हो रहा है. इसका सीधा कारण हम कह सकते हैं जो 60 लाख लोग मेट्रो से आते जाते थे आज उन सब को अपनी गाड़ियों या फिर अन्य साधनो से आना जाना पड़ रहा है । ऐसे में वे एक तरफ तो ट्रैफिक और दूसरे तरफ पर्यावरण दोनों,,,दोनों से प्रभावित हो रहे है.

पर अब एक लाजमी सवाल यह है कि आखिर डीएमआरीस के बार-बार पूरी तैयारी का दावा करने,, और दिल्ली सरकार के अनुरोध के बावजूद भी मेट्रो शुविधाये क्यो बंद पड़ी हैं?

अब ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे में दिल्ली मेट्रो इस संबंध में आखिर क्या कर रही है??

क्या दिल्ली मेट्रो को खोल देना चाहिए??

यदि दिल्ली मेट्रो को खोल दिया जाए तो उसके लिए किस तरह के प्रोटोकॉल तैयार किए जाने चाहिए???

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