भूमंडलीकरण के कारण जनसंचार माध्यमों का दायरा व्यापक एवं विस्तृत हो गया है। नव इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में इंटरनेट, अधिकांश जनसमुदाय द्वारा बोली एवं उपयोग में लायी जाने वाली हिंदी को अनेक लोगों तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है ” इंटरनेट को हिंदी में महाजाल कहते हैं।” यह महाजाल इंटरनेट उपभोक्ताओं को एक दूसरे से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। वेब मीडिया के प्रति लोगों का आकर्षण दिनों दिन बड़ता जा रहा है, आज ये मनुष्य के जीवन मे प्रवेश कर उन्हें प्रभावित कर रहा है।

इंटरनेट और हिंदी भाषा

हिंदी भाषा में सर्वप्रथम हिंदी वेबसाइट, बेबुनियाद डॉट कॉम( http://www.webduniya.com ) ने 1999 में इंटरनेट पर पहला कदम रखा। और अब जब 18-19 वर्षो का हिंदी का कालखंड इंटरनेट पर बीत चुका है तो जाहिर सी बात है कि इसका विस्तार भी हुआ। जिसके कारण विभिन्न वेबसाइट्स , ब्लॉग्स , सोशल मीडिया आदि अन्य के माध्यमों से अधिकांश जनसमुदाय तक हिंदी भाषा के पहुँचने का रास्ता आसान हो गया जिस कारण इंटरनेट पर दिन प्रतिदिन हिंदी के प्रचार एवं प्रसार की गति तेज हो रही है।

हिंदी वेबसाइट्स

आज इंटरनेट पर हिंदी भाषा की अनेक वेबसाइट हैं जिनमें भाषा, साहित्य, पत्रकारिता ,संगठन आदि से संबंधित कुछ साहित्यिक या साहित्येत्तर हैं। साहित्यिक के अंतर्गत हम अनुभूति, अभिव्यक्ति, रचनाकार , हिंदी समय, हिंदी नेस्ट, कविता कोश, संवाद, लघुकथा आदि, वेबसाइट्स देख सकते हैं जिनपर प्रतिदिन स्तरीय साहित्य प्रदर्शित होता रहता है।

रचनाकार विश्व की पहली यूनिकोड हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित लोकप्रिय ई-पत्रिका है और जिसके संपादक प्रसिद्ध ब्लॉगर रवि रतलामी हैं। इसके साथ साथ महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय , वर्धा के अभिक्रम के अंतर्गत बनाई गई हिंदीसमयडॉटकॉम ( http://www.hindisamay.com ) वेबसाइट पर तकरीबन 1000 रचनाकारों को हम पढ़ सकते हैं। इसके साथ साथ अधिकांश अखबार भी इंटरनेट पर आ चुके हैं जिनमें दैनिक जागरण, नवभारत टाईम्स(NBT) , हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, जनसत्ता, देशबंधु आदि शामिल हैं। अब इंटरनेट पर प्रकाशित समाचार दुनिया के किसी भी कोने में बैठा इंटरनेट उपभोक्ता किसी भी समय पढ़ सकता है। यूनिकोड, मंगल जैसे यूनिवर्सल फॉन्ट ने देवनागरी लिपि को कंप्यूटर पर, इंटरनेट द्वारा हिंदी भाषा के विकास के अनेक द्वार खोल दिए हैं।

हिंदी ब्लॉग्स (चिट्ठे)

आलोक कुमार के नौ दो ग्यारह नामक चिट्ठे से सन 2003 में हिंदी ब्लॉगिंग की यात्रा प्रारंभ हुई। आज हिंदी भाषा से संबंधित अनेक ब्लॉग्स इंटरनेट पर उपलब्ध हैं “आवश्यकता , उपयोगिता, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दुनिया के सेकेंडों में अपनी बात के जरिये जुड़ने वालो की बढ़ती संख्या को देखते हुए आज ब्लॉगिंग जैसे दूरगामी संचार, माध्यम का पांचवा स्तंभ माना जाने लगा है। कोई ऐसे वैकल्पिक तो कोई ऐसे नई मीडिया की संज्ञा से नवाजने लगा है ” ,हिंदी भाषा में अजीत वडनेरकर का शब्दों का सफ़र, आकांक्षा यादव का शब्दशिखर , सुशील कुमार का उल्लूक टाइम्स, डॉ.रूपचंद शास्त्री का उच्चारण, प्रभात रंजन का जानकीपुल, रविशंकर श्रीवास्तव का रचनाकार, गोपाल मिश्रा का अच्छी खबर आदि ब्लॉगों को हम उदाहरण के रूप में ले सकते हैं।

रविचंद्र प्रभात के शब्दों में हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने में हर उस चिट्ठाकार की महत्वपूर्ण भूमिका है जो बेहतर प्रस्तुतिकरण, गंभीर चिंतन, समसामयिक विषयों पर सूक्ष्म दृष्टि, सृजनात्मकता , समाज की कुसंगतियो पर प्रहार और साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी बात रखने में सफल हो रहे हैं। चिट्ठा लेखन और वाचन के लिए सबसे सुखद पहलू तो यह है कि हिंदी में बेहत्तर चिट्ठा लेखन की शुरुआत हो चुकी है जो कि हिंदी समाज के लिए शुभ संकेत हैं।

सोशल मीडिया में हिंदी

सोशल मीडिया के अंतर्गत फेसबुक ,ट्विटर, ऑर्कुट, आदि का समावेश होता है। इनके माध्यम से सोशल मीडिया के कारण हिंदी का प्रचार एवं प्रसार अनेक पाठकों तक हो रहा है। सोशल मीडिया के कारण हिंदी का साहित्य, कबीर से लेकर अब तक के रचनाकारों तक एक साथ पढ़ने को उपलब्ध हो रहा है। आज हम देखते हैं कि मोबाइल प्रयोगकर्ताओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है, जो आगे चलकर हिंदी के लिए उपयोगी सिद्ध होने वाली है।

सोशल मीडिया में हिंदी का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्र के लोग कर रहे हैं जिनमे अध्यापक,डॉक्टर , राजनेता, अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, खिलाड़ी आदि शामिल हैं जो कि, हिंदी के हित की ही बात है।

इसके साथ सोशल मीडिया के अंतर्गत यूट्यूब का भी महत्वपूर्ण स्थान है।यूट्यूब एक साझा वेबसाइट है जहाँ उपयोगकर्ता वेबसाइट पर वीडियो देख सकता है और वीडियो क्लिप साझा भी कर सकता है। यूट्यूब के माध्यम से हम इंटरनेट पर हिंदी भाषा के साहित्यिक क्षेत्र , शैक्षिक, सामाजिक , राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक क्षेत्र से संबंधित अनेकानेक वीडियो किसी भी समय देख सकते हैं, सुन सकते हैं।इसके साथ साथ विभिन्न न्यूज़ चैनलों के कार्यक्रम(यथा सोनी, ज़ी, नेशनल ज्योग्राफिकल, डिस्कवरी आदि)को किसी भी समय देख सकते हैं या सुन सकते हैं।

इंटरनेट पर हिंदी साहित्यिक सीमाओं को लांघकर अपना प्रचार प्रसार कर रही है वह कहानी, उपन्यास से आगे बढ़कर अनेकानेक साहित्यिक तथा साहित्येत्तर विधाओं में विश्व की अन्य भाषाओं से कदमताल कर रही है।

निष्कर्ष

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि 21वी सदी के नव इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में हिंदी का इंटरनेट के माध्यम से दिन प्रतिदिन प्रचार और प्रसार हो रहा है। मीडिया के इस युग मे हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में हिंदी की विभिन्न वेबसाइट्स, हिंदी ब्लॉग्स(चिट्ठे) , सोशल मीडिया आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी भाषा के युग मे आधुनिक समय मे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया , विज्ञापन ,पत्रकारिता, और सिनेमा के साथ साथ इंटरनेट भी हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और भविष्य में भी योगदान देता रहेगा इसमें दो राय नहीं ।।

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