न्यू मीडिया संचार का वह संवदनात्मक(INTERACTIVE) स्वरूप है जिसमें इंटरनेट का उपयोग करते हुए हम पॉडकास्ट,RSS FEED, सोशल नेटवर्क(फ़ेसबुक, माई स्पेस, ट्विटर) ब्लॉग्स, विक्कीस, टेक्स्ट मेसेजिंग आदि का उपयोग करते हुए पारस्परिक संवाद स्थापित करते हैं।यह संवाद माध्यम बहु संचार संवाद का रूप धारण कर लेता है जिसमें पाठक, दर्शक, श्रोता तुरंत अपनी टिप्पणी न केवल लेखक,प्रकाशक से साझा कर सकते हैं बल्कि अन्य लोग भी प्रकाशित, प्रसारित, संचारित व विषय वस्तु पर अपनी टिप्पड़ी दे सकते हैं। यह टिप्पणी एक से अधिक भी हो सकती है अर्थात बहुधा सशक्त टिप्पड़ियाँ परिचर्चा में परिवर्तित हो जाती हैं। जैसे आप फेसबुक को ही लेले- यदि आप कोई संदेश प्रकाशित करते हैं और बहुत से लोग आपकी विषय वस्तु पर टिप्पणी देते हैं तो कई बार पाठक वर्ग परस्पर परिचर्चा आरंभ कर देते हैं और लेखक एक से अधिक टिप्पणी का उत्तर देते हैं।

नई मीडिया वास्तव में परंपरागत मीडिया का संशोधित रूप है जिसमें तकनीकी क्रांतिकारी परिवर्तन व इसका नया रूप सम्मलित है।

नई मीडिया(NEW MEDIA) के विकास का इतिहास(HISTORY)

१९५० के दशक में कंप्यूटिंग और कट्टरपंथी कला के बीच संबंध मजबूत होने लगे। इस अवधि के दौरान मीडिया सिद्धांत के विकास में मार्शल मैकलुहान जैसे लेखकों और दार्शनिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।UNDERSTANDING MEDIA: THE EXTENSION OF MAN(1964) में उनकी तब तक कि प्रसिद्ध घोषणा माध्यम सन्देश है ने बहुत ध्यान आकर्षित किया। 1980 के दशक तक मीडिया मुख्यता प्रिंट और एनालॉग प्रसारण मॉडल पर निर्भर था, जैसे टेलीविजन और रेडियो । पिछले पच्चीस वर्षों में मीडिया में तेजी से परिवर्तन देखा गया है जो डिजिटल प्रद्योगिकी जैसे इंटरनेट और वीडियो गेम के उपयोग पर आधारित है। हालांकि ये उदाहरण केवल नए मीडिया का एक छोटा सा प्रतिनिधित्व है। डिजिटल कंप्यूटर के उपयोग ने शेष पुराने मीडिया को बदल दिया, जैसा कि डिजिटल टेलीविजन और ऑनलाइन प्रकाशकों के आगमन से पता चलता है।

एंड्रू एल शापिरो(1999) का तर्क है कि न्यू डिजिटल तकनीकों का उद्भव सूचना अनुभव और संसाधनों के नियंत्रण में संभावित रूप से मौलिक बदलाव का संकेत देता है।

वैसे तो नई मीडिया का अपना कोई इतिहास नहीं है पर 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद और पहले एक लंबा चौड़ा इतिहास देखने को मिलता है जिसमें इंटरनेट ने विस्तृत रूप से अपनी मुख्य भूमिका निभाई है। इंटरनेट और नई मीडिया दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं अर्थात इंटरनेट न हो तो नई मीडिया का प्रयोग होना असंभव है जबकि अगर नई मीडिया न हो तो इंटरनेट का कोई बजूद नहीं रह जायेगा।

इंटरनेट की विकास यात्रा

1958 में ग्राहम वेल ने टेलीफोन की खोज की जिसने बाइनरी डेटा संचालित करने वाले मोडम की शुरुआत की। ऐसा माना जाता है कि यहीं से इंटरनेट के विकास की शुरुआत हुई।

1962 में जे सी आर लिकलीडर ने कंप्यूटर के जाल का प्रारंभिक रूप तैयार किया।

1966 में दारमा ने मोर्चाबंदी प्रगति अनुसंधान परियोजना अभिकरण (DARPA) का आरपानेट के रूप में कंप्यूटर के जाल को बनाया।

1969 में अमेरिका के रक्षा विभाग स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान ने इंटरनेट की संरचना की।

1972 में इंटरनेट का सजीव प्रदर्शन हुआ।

1973 में कम्युनिकेशन प्रोटोकाल तथा इंटरनेटिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की गयी। जिसके बाद अधिकारिक रूप से इसका नाम इंटरनेट पड़ा।

1979 में इंटरनेट का प्रयोग डाकघरों में होने लगा।

1980 में बिलगेट्स का IBM के साथ सौदा हुआ जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट की शुरूआत हुआ तथा इसी साल इसका व्यापारिक रूप से इस्तेमाल शुरू हुआ।

सन 1983 में इंटरनेट में कानूनों का निर्माण , मार्गदर्शक प्रोटोकाल , दस्तावेज के प्रकाशन क् तरीका तथा उच्चस्तरीय कार्यविधि पर जोर देने का काम शुरू हुआ।

1984 में एप्पल ने आधुनिक सफल कंप्यूटर को लांच किया।

1986 में NSF NET का विकास किया गया, जिसे इंटरनेट का BACKBONE कहा जा सकता है।

1989-90 में WWW का आगमन TIM BERNAR LEE द्वारा किया गया।

1996 में गूगल का आगमन एक अनुसंधान के रूप में हुआ पर बाद में इसने अौपचारिक रूप धारण कर लिया।

2009 में स्टीफन वोल्फरैम द्वारा wolfram alfa की शुरुआत की गई।

वर्तमान समय में इंटरनेट के विविध प्रयोग

वर्तमान समय में इंटरनेट एक ऐसा शब्द है जिससे शायद ही कोई परिचित न हो,इंटरनेट के बिना आज जीवन की कल्पना कर पाना मुश्किल है।यह सम्पूर्ण विश्व में फैला हुआ एक ऐसा नेटवर्क है जिसके माध्यम से एक कंप्यूटर विश्व के किसी भी अन्य कंप्यूटर से जुड़ने में समर्थ हैं। जिसे कनेक्टेड कंप्यूटर का नेटवर्क भी कहा जा सकता है।

जिस प्रकार देश में फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति आयी थी , दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति चलाई गई थी उसी प्रकार अगर इस सदी में देखे तो ऐसा लगता है कि मानो , वर्तमान समय में INTERNET KRANTI चल रही हो। क्योकि इसके क्षेत्र में नित नए आविष्कार और सुविधाएं प्रदान की जा रहीं हैं उससे लगता है कि अब शायद ही कोई क्षेत्र हो जो इससे अछूता रह गया हो।

इंटरनेट के विविध उपयोग/प्रयोग

आज हम जिस तरफ नजर डाले उस तरफ हमें इंटरनेट के उपयोग और उसके आवश्यकता का अनुभव होता रहता है। जिन्हें निम्न बिंदुओं में समझ सकते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यकता

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में जरूरत

विस्तृत रूप से जानकारी देने में सक्षम

त्वरित खबरों की जानकारी देने में सक्षम

ऑनलाइन अथवा नेट बैंकिंग को आसान बनाने में सक्षम

ई-कॉमर्स, एम-कॉमर्स,संचार के साधन में तीव्रता

मनोरंजन का साधन

ऑनलाइन फ्रीलांसर का आसान तरीका

देता शेयरिंग में तीव्र आदि।

इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि आज बिना इंटरनेट के अपने सुगम कार्य की कल्पना नहीं कर सकते , जिससे यह तथ्य स्पष्ट है कि इंटरनेट की उपयोगिता और आवश्यकता हमारे लिए कितना अवश्य

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